World Anaesthesia Day: पेन लेस डिलीवरी के लिए ‘एनेस्थेटिक’ की अहमियत बढ़ी

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। दुनिया में नया जीवन लाने में मां की हिम्मत बनकर एनेस्थेटिस्ट सामने आते हैं। नार्मल डिलीवरी में एनेस्थीसिया विधि ही तो है, जो जननी का हौसला बढ़ा देती है। इस तरह की उपलब्धियों और चिकित्सा की विधि से जुड़ी जानकारियों के साथ चिकित्सक जूम एप पर जुड़े। वर्ल्ड एनेस्थीसिया दिवस पर केक काटकर …

मुरादाबाद,अमृत विचार। दुनिया में नया जीवन लाने में मां की हिम्मत बनकर एनेस्थेटिस्ट सामने आते हैं। नार्मल डिलीवरी में एनेस्थीसिया विधि ही तो है, जो जननी का हौसला बढ़ा देती है। इस तरह की उपलब्धियों और चिकित्सा की विधि से जुड़ी जानकारियों के साथ चिकित्सक जूम एप पर जुड़े। वर्ल्ड एनेस्थीसिया दिवस पर केक काटकर वर्षगांठ मनाई गई। साथ ही इस फील्ड में बढ़ते स्कोप और नए चिकित्सकों के लगातार आने पर खुशी भी जाहिर की गई।

मुरादाबाद एनेस्थीसिया सोसाइटी के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। नया मुरादाबाद स्थित ब्राइट स्टार अस्पताल में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अस्पताल के निदेशक व सोसाइटी के सचिव डा. किशन वाष्र्णेय ने बताया कि नार्मल प्रसव के दौरान पेन लेस डिलीवरी के लिए एनेस्थेटिक की अहमतियत बढ़ी है। पीठ में एक इंजेक्शन लगता है, जिससे प्रसव के दौरान दर्द का महिलाओं को अहसास नहीं होता है। चिकित्सक को नार्मल डिलीवरी करने में आसानी हो जाती है।

ऑपरेशन के वक्त एनेस्थीसिया का काफी रोल होता है। ऑपरेशन के दर्द का अहसास मरीज को न हो, इसलिए एनेस्थेटिस्ट का सहयोग लिया जाता है। पहले मरीजों को एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद एक से दो दिन तक भर्ती करना पड़ता था, पर अब दो घंटे में मरीज डिस्चार्ज किए जाने लगे हैं। एनेस्थेटिस्ट की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए उसे क्रिटिकल केयर में भी भूमिका निभाने का अवसर मिला है। वेंटिलेटर की व्यवस्था में भी एनेस्थेटिस्ट की जरूरत रहती है। अध्यक्ष डा. आशिमा ने सिद्ध हास्पिटल से जूम एप के जरिए इस फील्ड में नए चिकित्सकों के आने पर खुशी जताई। उन्होंने बताया कि पहले जहां सीटे खाली रह जाती थी, अब वे फटाफट पूरी हो जाती हैं।

क्या है एनेस्थीसिया
एनेस्थीसिया के कुछ प्रकार भी होते हैं। इनका सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होता है। इनमें पहला है, जनरल एनेस्थीसिया। सामान्य एनेस्थीसिया के जरिए ऑपरेशन के वक्त मरीज को बेहोश करने का प्रयास किया जाता है। इसका इस्तेमाल ज्यादा बड़े या गंभीर ऑपरेशन में किया जाता है। दूसरा है, लोकल एनेस्थीसिया। सर्जरी वाली जगह को सुन्न करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। ज्यादातर इसे छोटी सर्जरी में प्रयोग किया जाता है। इसमें मरीज बेहोश नहीं होता है, सिर्फ जहां ऑपरेशन हो रहा होता है, वहां उसे दर्द का अहसास नहीं होता है। मॉनिटर्ड एनेस्थीसिया और रीजनल एनेस्थीसिया विधि का भी प्रयोग किया जाता है।

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