बरेली: कसूर पुलिस का...बेकसूरों को काटनी पड़ती है जेल, राघव की कहानी बनी मिसाल

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Edited By Amrit Vichar
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राघव जैसे कई और लोग जिन्हें पुलिस की एकतरफा विवेचना की वजह से लंबे समय रहना पड़ा जेल में

बरेली, अमृत विचार। राघव की कहानी इसलिए मिसाल बन गई क्योंकि अदालत ने उन पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने वाली लड़की को भी उतने ही दिन जेल में रहने की सजा सुनाई, जितने समय राघव को जेल में रहना पड़ा था। अदालत इससे ज्यादा इंसाफ और क्या करती लेकिन राघव ने 1653 दिन जेल में रहकर जो खो दिया, उसकी भरपाई असंभव है। राघव अकेले ऐसे नहीं हैं जिन्हें बेकसूर होते हुए भी सजा काटनी पड़ी। बेकसूर लोगों की जिंदगी तबाह कर देने वाले कई और केस हैं जो न्याय प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। खासतौर पर पुलिस की कमजोर विवेचनाओं पर।

नेकपुर में किराए के मकान में रहने वाले अजय उर्फ राघव पर 2019 में एक महिला ने थाना बारादरी में अपनी बेटी को दिल्ली ले जाकर दुष्कर्म करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद 1653 दिन तक जेल में काटने के बाद राघव 4 मई 2024 को बेगुनाह साबित हो पाए। घर के इकलौते बेटे राघव जब जेल गए थे, तब उनकी उम्र करीब 20 वर्ष थी। उनका पूरा परिवार तबाह हो गया। 

मूल रूप से फिरोजाबाद के राघव पिता के निधन के बाद मां और दो बहनों के साथ बरेली आकर जागरण में झांकी सजाकर परिवार का पेट भर रहे थे। उनके जेल जाने के बाद परिवार दो वक्त की रोटी तक के लिए तक मोहताज हो गया, वकील की फीस कहां से भरते। हालत पर तरस खाकर वकील नवीन बिन गोस्वामी ने ही उनकी मदद शुरू कर दी। आखिर में राघव को ऐतिहासिक न्याय भी दिलाया। राघव की मां को मलाल है कि उनके बेटे ने चार साल उस गुनाह की सजा काटी, जो किया ही नहीं था।

केस-1

पत्नी की हत्या के आरोप मे डेढ़ साल जेल काटकर हुए बरी
वर्ष 2020 में भमोरा के गांव निताई में एक महिला के आत्महत्या करने के बाद उसके भाई ने थाना भमोरा में बहनोई नवल किशोर, उनके माता-पिता और बहन पर दहेज हत्या का केस दर्ज करा दिया। नवल किशोर करीब डेढ़ वर्ष जेल मे रहने के बाद जमानत पर रिहा हुआ था। 29 अप्रैल को स्पेशल कोर्ट एससी/एसटी एक्ट ने नवल किशोर और उनके परिजनों को दोषमुक्त करार दिया। मुकदमा दर्ज कराने वाला रामगोपाल गवाही में आरोपों से मुकर गया। इस पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कारण बताओं नोटिस भी जारी किया गया।

केस-2

बेकसूर थे, फिर भी 13 साल तक चला हत्या का मुकदमा
वर्ष 2011 में थाना भोजीपुरा में दर्ज हुए हत्या के केस में आरोपी देवरनियां के गांव वसुधरन जागीर निवासी सुरेश चंद्र उर्फ छोटे को अपर सत्र न्यायाधीश ने 13 मार्च को बरी कर दिया। सुरेश का टेंपो चलाने वाले केसर लाल गंगवार की पत्नी ने उन पर पति की हत्या का आरोप लगाया था। 23 जून 2011 की शाम केसर लाल गंगवार का शव वसुधरन रोड पर खाई में मिला था। सुरेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कोर्ट ने पाया कि आरोप बगैर सबूत के लगाए गए हैं और आरोपी सुरेश चंद्र को दोषमुक्त करार दे दिया।

पुलिस तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करती है। प्रयास रहता है कि किसी भी निर्दोष पर कानूनी कार्रवाई न हो। ऐसे मामलों से बचने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। विवेचना के दौरान पाया जाता है कि कोई निर्दोष है तो केस से उसका नाम बाहर निकाल दिया जाता है। दोषी को सख्त सजा दिलाने के लिए पुलिस साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल करती है- मुकेश प्रताप सिंह, एसपी क्राइम।

राघव के मामले में आया फैसला काफी अहम है। गरीब परिवार के पास रोजी रोटी का संकट था। जब उसकी मां कचहरी आती थी तो हम लोगों को बहुत दया आती थी। उसकी हर संभव मदद की गई है। जितने दिन राघव जेल में रहा है, उतना ही दिन बयान से मुकरी युवती को भी जेल में रहना होगा। पुलिस को भी चाहिए कि केस दर्ज होने के बाद गहनता से जांच करें। ताकि निर्दोष व्यक्ति को जेल न जाना पड़े -नवीन कुमार, अधिवक्ता।

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