पीलीभीत: वन और वन्यजीव से संबंधित सूचनाओं का होगा आदान-प्रदान, पीटीआर में बनेगा मास्टर कंट्रोल रूम

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। अब चाहे पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) से बाहर बाघ समेत अन्य वन्यजीव के निकलने की सूचना हो या फिर जंगल में आग की, इस तरह की सभी सूचनाएं अब पीटीआर में एक ही प्लेटफार्म पर दी जा सकेगी। सूचना मिलने के बाद इस पर त्वरित एक्शन भी लिया जाएगा।

इसको लेकर पीटीआर में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना की जाएगी। मास्टर कंट्रोल रूम ग्लोबल टाइगर फोरम, विश्व प्रकृति निधि एवं पीटीआर के सहयोग से स्थापित कराया जाएगा।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सूचनाओं के आदान-प्रदान को मुख्यालय समेत सभी पांच रेंजों में कंट्रोल रूम स्थापित है। अमूमन जब कोई बाघ या अन्य वन्यजीव जंगल से बाहर निकलता है, या फिर कोई मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना प्रकाश में आती है तो सबसे पहले इसकी सूचना अमूमन बाघ मित्रों या फिर वॉचरों को मिलती है। 

सूचना मिलने के बाद बाघ मित्र, वॉचर या फिर वनकर्मी मौके पर तस्दीक करने के बाद इसकी सूचना मोबाइल फोन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को भेजते हैं। भेजी गई सूचना केवल संबंधित वन अफसर तक ही सीमित रहती है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को तब ही लग पाती है जब कोई बड़ा मामला होता है। ऐसे में ऐसे में फर्स्ट लाइन वर्कर द्वारा दी गई सूचना एक ही स्तर तक पहुंच पाती है। मुख्यालय तक यह सूचनाएं संबधित वन अफसरों के द्वारा दी जाती है। ऐसे में कभी-कभार सूचना मिलने में देरी हो जाती है। 

सूचना तंत्र को रियल टाइम एक्सेस करने के लिए अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना की जाएगी। मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना पीलीभीत टाइगर रिजर्व, विश्व प्रकृति निधि(डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) एवं ग्लोबल टाइगर फोरम के सहयोग से की जाएगी। मास्टर कंट्रोल रूम खुल जाने वाले बाद वन एवं वन्यजीवों से जुड़ी कोई भी सूचना पहले सीधे पीटीआर मुख्यालय स्थित मास्टर कंट्रोल रूम में पहुंचेगी। 

इसके बाद यह सूचना संबंधित वन अफसरों और कर्मचारियों तक पहुंचेगी। माना जाए तो अब सभी सूचनाएं मुख्यालय के अधिकारियों की निगाह में रहेगी। मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना से सूचनाओं के आदान-प्रदान में समय की बचत तो होगी ही, साथ ही इन सूचनाओं पर त्वरित एक्शन भी लिया जा सकेगा। वन अफसरों की मानें तो पीटीआर मुख्यालय पर जल्द ही इसकी स्थापना की जाएगी।

आग जैसी घटनाओं पर तत्काल किया जा सकेगा नियंत्रण
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 15 फरवरी से लेकर 15 जून तक फायर सीजन होता है। वनों को आग से बचाने के लिए फायर सीजन के दौरान पीटीआर मुख्यालय समेत फील्ड डायरेक्टर कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। यह कंट्रोल रूम केवल फायर सीजन के दौरान ही संचालित किए जाते हैं। 

फायर सीजन के इतर यदि जंगल में कोई आग लगती है तो इसकी सूचना मुख्यालय तक आने में काफी देर हो चुकी होती है। ऐसे में वन संपदा का खासा नुकसान होता है। पीटीआर में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना के बाद आग की घटनाओं की जानकारी मिलने पर उस पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सकेगा।

सूचना तंत्र को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए पीटीआर में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना की जाएगी। वन एवं वन्यजीव से संबंधित सभी सूचनाएं अब एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध हो सकेगी और इन पर तत्काल एक्शन लिया जा सकेगा। मास्टर कंट्रोल रूम ग्लोबल टाइगर फोरम, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और पीटीआर के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। - मनीष सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर

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