अनजाने में की गई जातिसूचक टिप्पणी के आधार पर मुकदमा चलाना अनुचित :हाईकोर्ट
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनजाने में की गई जातिसूचक टिप्पणी पर एससी/एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को रद्द करते हुए अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के विरुद्ध अनजाने में की गई जातिसूचक टिप्पणी पर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(बी) का अपराध नहीं बनता। ऐसा अपराध तभी माना जाएगा, जब टिप्पणी करने वाला जानता हो कि जिसके खिलाफ वह जातिसूचक अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा है, वह अनुसूचित जाति का व्यक्ति है।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने देहरादून निवासी अलका सेठी की याचिका पर पारित किया। इसके अलावा काेर्ट ने यह भी कहा कि एससी/एसटी कानून कमजोर को अत्याचार से संरक्षण देने के लिए बनाया गया है, लेकिन व्यक्तिगत हित या प्रतिशोध और खुद को बचाने के लिए लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
