कासगंज: साइबर के समुंद्र में डूब रहे नौनिहाल, अभिभावक अनजान
सोशल मीडिया की लत से बच्चों की सेहत पर पड रहा है बुरा असर
गुड्डू यादव/कासगंज,अमृत विचार: पढ़ने लिखने की उम्र में नौनिहाल साइबर के समुंद्र में डूब रहे हैं। सोशल मीडिया से यारी बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। सेहत पर खतरनाक असर हो रहा है। वे बार-बार अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट की न्यूज फीड चेक करते हैं। सोशल अकाउंट को बार-बार देखने की ये आदत मेंटल हेल्थ को खराब कर रही है। बच्चों के अभिभावक भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
कोरोना काल के दौरान बच्चे कई महीनों तक घर पर रहे थे, पढ़ाई भी आनलाइन तरीके से हुई। पढ़ने के लिए स्मार्टफोन और लैपटॉप मिल गए। लंबे समय तक उन्होंने इनका इस्तेमाल किया। पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए भी स्मार्ट फोन का सहारा लिया, लेकिन अब ये पढ़ाई के लिए आनलाइन कराई गई सुविधाएं बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रहे हैं। बच्चे इसका प्रयोग सोशल मीडिया चलाने के लिए कर रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम पर सक्रियता काफी बढ़ गई है।
इस वजह से बच्चों की सेहत खराब हो रही है। सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर खतरनाक असर पड़ रहा है। स्मार्ट फोन की लत से बच्चे हिंसक भी हो रहे हैं और उनकी नींद का पैटर्न बिगड़ रहा है।. कई मामलों में अपने माता-पिता से छुपकर भी सोशल मीडिया चला रहे हैं।
बच्चे सोशल मीडिया पर रहते हैं एक्टिव
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने का बड़ा कारण यह है कि बच्चे मशहूर लोगों से प्रभावित है और सोशल मीडिया पर उनके फेसबुक और इंस्टा अकाउंट्स को फॉलो करते हैं। इसके अलावा बच्चे यह भी जानना चाहते हैं कि उनको दोस्त क्या कर रहे हैं, वे इनसे सोशल मीडिया के जरिए जुड़ना चाहते हैं। स्मार्ट फोन का इस्तेमाल गेमिंग के लिए भी किया जा रहा है। कई मामले ऐसे देखे जा रहे हैं, जहां बच्चों को गेमिंग की लत लग गई है और वे घंटों फोन पर समय बीता रहे हैं। घर वालों की गैर मौजूदगी में ये ज्यादा हो रहा है।
सोशल मीडिया से बच्चों पर ही नही समाज पर भी बुरा असर पड़ रहा है। अभिवावकों को आगे आना चाहिए। अपने अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। मोबाइल को जरुरत के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए।अक्सर बच्चे सोशल मीडिया को देखकर हिंसक हो रहे हैं, गलत सौहरत में पड़ रहे हैं- मुकेंद्र कुमार, प्रधानाध्यापक, नगला देवी।
जो बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, तो वे बाहरी चीजों के बारे में कुछ सोच नहीं पाते। इतने रम जाते हैं कि कोई उन्हें रोकता है, टोकता है, तो खराब लगता है। कहीं भी होते हैं तो उनका ध्यान सोशल मीडिया पर ही रहता है। यहीं कारण है कि बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, आंखो की नजर कम हो रही है। साथ ही परिवार के प्रति बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखा जाता है। जिसे लेकर अभिभावक बड़े ही चिंतित रहते हैं- डा,अंजू यादव, एमबीबीएस, एमएस।
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