दीक्षा ऐप के इस्तेमाल में प्रदेश में छठवें स्थान पर रहा Unnao, जारी सूची के मुताबिक 6471 डिवाइस पर 19630 सामग्री का किया गया अध्ययन
उन्नाव दीक्षा ऐप के इस्तेमाल में प्रदेश में छठवें स्थान पर रहा
उन्नाव, अमृत विचार। डीजी स्कूल ( शिक्षा ) कंचन वर्मा ने दीक्षा ऐप का उपयोग करने वाले जिलों का मूल्यांकन कराते हुए रैकिंग जारी की है। जिसमें जिला प्रदेश में छठवीं रैंक पर रहा है। हालांकि, जारी आंकड़े साबित करते हैं कि अभी ऐप इस्तेमाल करने वालों में शिक्षक भले शामिल हैं। लेकिन, परिषदीय स्कूलों के बच्चे मोबाइल के जरिए अध्ययन नहीं कर पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कोविड के दौरान निजी स्कूलों की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी बच्चों को आनलाइन होमवर्क उपलब्ध कराया जाता था। शिक्षकों के मुताबिक विभागीय अधिकारियों ने यह व्यवस्था भले ही सुनिश्चित करा रखी थी। लेकिन, ग्रामीण आबादी में एंड्रायड फोन की अनुपलब्धता होने से यह प्रयोग सफल नहीं साबित हो सका था।
अव्वल तो संबंधित परिवारों में एंड्रायड हैंडसेट नहीं थे और जिन 10-20 परिवारों में उपलब्धता भी थी तो खराब होने के भय से अभिभावक बच्चों को अपना फोन नहीं देते थे। डीजी की ओर से जारी सूची के मुताबिक जिले में मई माह के पहले पखवाड़े में 6471 डिवाइस (मोबाइल, लैपटाप व टैबलेट) पर दीक्षा ऐप का इस्तेमाल हुआ। संबंधित डिवाइसों के माध्यम से 19630 सामग्री को देखा (अध्ययन) किया गया।
इन आंकड़ों के आधार पर प्राप्त छठवीं रैंक कहने में तो अच्छी लगती है लेकिन, हकीकत में ऐप का उपयोग अध्यापन कार्य में न होने का संकेत देते हैं। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 4842, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 3881 और विद्यालयों में तकरीबन 458 हेड शिक्षक-शिक्षिकाएं तैनात हैं। इसके अलावा शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को मिलाकर यह संख्या लगभग 18 से 20 हजार तक पहुंच सकती है, जबकि ऐप का इस्तेमाल मात्र करीब 6500 डिवाइस पर हुआ है।
विभाग ने परिषदीय विद्यालयों को जहां टैबलेट्स उपलब्ध करा रखे हैं। वहीं जिले में संचालित करीब 20 फीसदी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एलईडी स्थापित कराए जा चुके हैं, जिन्हें स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर बच्चों को पढ़ाया जा सकता है।
इसके बावजूद कहना अतिश्योक्ति न होगी बच्चों को ऐप से पढ़ाने के बजाए शिक्षकों ने स्वयं ऐप इस्तेमाल करते हुए आनलाइन डाटा में जिले की उपस्थिति दर्ज कराई है। एक शिक्षक ने नाम न प्रकाशित किए जाने की शर्त पर बताया कि ऐप बच्चों को विद्यालय में न रहते हुए अध्ययन करने के लिए सृजित कराया गया है, जबकि ग्रामीण बच्चों की पहुंच से मोबाइल फोन अभी दूर है।
