Exclusive: बोरियों में 500 ग्राम से डेढ़ किलोग्राम तक कम निकल रहा राशन, उचित दर विक्रेताओं के यहां तौल में पूरा नहीं होता खाद्यान्न

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जून में राशनकार्ड धारकों को नहीं बांटा जाएगा बाजरा, गेहूं व चावल ही मिलेगा

अजय मिश्र, कन्नौज। उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) के यहां हर महीने दावे के मुताबिक राशन नहीं पहुंचता है। खाद्य एवं रसद विभाग लिखी सरकारी बोरी पर दावा तो 50 किलोग्राम राशन भरा होने का है लेकिन हकीकत में प्रति बोरी 500 ग्राम से डेढ़ किलोग्राम तक कम निकलता है। 

जिलेभर में ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में कुल 652 उचित दर विक्रेता हैं। इनसे जुड़े हुए 3.20 लाख कार्डधारक और 12.66 लाख यूनिट हैं। हर महीने कोटेदारों के यहां उतरने वाला राशन पूरा नहीं होता है। एक कोटेदार ने बताया कि कभी-कभी तो एक-एक बोरी में दो-दो किलोग्राम तक गेहूं, चावल व बाजरा आदि कम निकलता है। साथ ही कई बार गेहूं व चावल साफ नहीं आता, इस वजह से कार्डधारकों से नोकझोक भी होती है। 

मई में कार्डधारकों को गेहूं, चावल व बाजरा वितरित किया गया, जून में बाजरा नहीं दिया जाएगा। अगले महीने वितरण के लिए राशन से भरी बोरियां अभी से ही कोटेदारों के यहां से पहुंचने लगी हैं। कुछ कोटेदारों ने जब ट्रक में ही बोरियों का वजन कराया तो हैरान रह गए। उनका कहना है कि कम राशन देकर कोटेदारों को चोर बनाया जा रहा है। जब कोटेदार कार्डधारकों को राशन कम देते हैं तो उन पर ही उलटी कार्रवाई की जाती है। 
 
बोरियां में पानी डालकर भेजा जाता है राशन

एक कोटेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गेहूं से भरी जो बोरियां आतीं हैं उन पर पानी छिड़क दिया जाता है। इससे वजन बढ़ जाता है। जब तक वाहन दूसरे जिले और वहां से उचित दर विक्रेताओं के यहां पहुंचता है तो पानी सूख जाता है। 

इससे बोरी 50 किलोग्राम की नहीं रहती है। दावा यह भी है कि राशन की बोरियों पर पानी डालते हुए व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडियो पर प्रसारित हो रहा है। यह इटावा का बताया जा रहा है। इसकी अधिकारियों से शिकायतें भी की गईं हैं, लेकिन सुनवाई नहीं की गई। 

एफसीआई से राशन भरकर ट्रक सीधे उचित दर विक्रेताओं के यहां पहुंचता है। पूरे ट्रक का वजन होता है। बोरियों में वजन अलग-अलग होता है, लेकिन वह औसत रहता है। खाद्यान्न से भरी बोरियों में कुछ का वजन कर औसत रास्ता निकाल लिया जाता है। - राजीव मिश्र, डीएसओ

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