एक बड़ी जीत
बौद्धिक संपदा, आनुवंशिक संसाधनों (जीआर) और संबंधित पारंपरिक ज्ञान (एटीके) पर विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की संधि, वैश्विक दक्षिण के देशों और भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। यह संधि सामूहिक विकास हासिल करने और स्थायी भविष्य का वादा पूरा करने की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है, जिसका भारत ने सदियों से समर्थन किया है।
यह संधि न केवल जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण करेगी, बल्कि पेटेंट प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगी और नवाचार को मजबूत करेगी। यह संधि भारतीय आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगी। हालांकि ये वर्तमान में भारत में संरक्षित हैं, लेकिन उन देशों में इनके दुरुपयोग की संभावना है, जहां प्रकटीकरण दायित्व नहीं हैं।
वर्तमान पेटेंट कानून में ऐसा कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है जिसके तहत पेटेंट आवेदकों से उस स्थिति में उत्पत्ति के देश या स्रोत का खुलासा करने की अपेक्षा की जाती हो जहां आविष्कार आनुवंशिक संसाधनों पर आधारित हो। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इस संधि के लिए विकसित देशों सहित अनुबंध करने वाले पक्षों को पेटेंट आवेदकों पर मूल दायित्वों के प्रकटीकरण को लागू करने के लिए अपने मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव लाने की जरूरत होगी।
गौरतलब है कि डब्ल्यूआईपीओ एक संयुक्त राष्ट्र विशेष एजेंसी है जिसे 1967 में बौद्धिक संपदा (आईपी) संरक्षण को बढ़ावा देने और दुनिया भर में रचनात्मक गतिविधि को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया था। डब्ल्यूआईपीओ मूल रूप से आईपी नीति, सेवाओं, सूचना और सहयोग के लिए एक वैश्विक मंच है।
भारत 1975 में डब्ल्यूआईपीओ में शामिल हुआ। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा प्रकाशित वैश्विक नवाचार सूचकांक रैंकिंग (जीआईआई) में भारत 132 अर्थव्यवस्थाओं में से 40वें स्थान पर बना हुआ है। हाल के वर्षों में भारत ने जीआईआई में छलांग लगाई है। 2019 जीआईआई में भारत 52वें स्थान पर था।
जीआईआई दुनिया भर की सरकारों के लिए अपने-अपने देशों में नवाचार-आधारित सामाजिक और आर्थिक बदलावों का आकलन करने का एक विश्वसनीय साधन है। जीआईआई रैंकिंग में लगातार सुधार का श्रेय अपार ज्ञान पूंजी, जीवंत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और सार्वजनिक और निजी अनुसंधान संगठनों द्वारा किए गए अद्भुत काम को जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में, जीआईआई ने खुद को विभिन्न सरकारों के लिए एक नीतिगत उपकरण के रूप में स्थापित किया है और उन्हें मौजूदा यथास्थिति पर विचार करने में मदद की है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) भी नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर भारत की यात्रा में सहयोग कर रहा है। वास्तव में यह संधि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, जो पारंपरिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता की प्रचुरता के साथ जैव विविधता वाले केंद्रों का केंद्र है।
