बाराबंकी: कूड़े की शक्ल में तब्दील हो गए कूड़ा उठाने के लिए आये ई-रिक्शे, 41 लाख की धनराशि से 25 ग्राम पंचायतों में हुई थी खरीद
बिना टेंडर प्रधान व सचिव ने की खरीद
दीपराज सिंह/देवा, बाराबंकी, अमृत विचार। 'गाड़ी वाला आया घर से कचड़ा निकाल' गीत को ग्राम पंचायतों में लागू करने के उद्देश्य से घरों से कचरा उठाने के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा खुद कचड़ा बनते जा रहे हैं। लाखों की कीमत से खरीदे गए यह ई-रिक्शा प्रधानों के दरवाजे पर खड़े होकर धूल फांक रहे हैं।
ग्राम पंचायत में प्रत्येक घरों से कूड़ा लेकर उसे कूड़ा घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से करीब चार माह पहले विकास खंड देवा की 25 ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि मद से ई-रिक्शा खरीदे गए थे। प्रत्येक ई रिक्शा की कीमत तकरीबन एक लाख 65 हजार रूपये थी। 25 ग्राम पंचायतों में ई रिक्शा खरीदने के नाम पर करीब 41 लाख रुपए खर्च किये गए हैं।
इतनी भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। खरीदे जाने के बाद यह ई रिक्शा ग्राम प्रधानों के दरवाजे खड़े-खड़े खुद कूड़े की शक्ल में तब्दील होने की कगार पर हैं।इन ई रिक्शा को चलाने के लिए ड्राइवर की व्यवस्था की जाएगी या सफाई कर्मी इसको चलाएंगे या फिर किसी अन्य संस्था के द्वारा इनका संचालन किया जाएगा। यह भी अभी तय नहीं हो सका है। बिना चालक की व्यवस्था के इन ई रिक्शा की खरीदारी कहीं न कहीं कमीशन बाजी की ओर भी इशारा कर रहा है।

विभागीय सूत्रों की माने तो इनकी खरीदारी के लिए कोई टेंडर भी नहीं किया गया। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने सीधे इनकी खरीदारी की है। इस संबंध में जब खंड विकास अधिकारी देवा डा. नेहा शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में एडीओ पंचायत से बात करिये। वही इसकी जानकारी दे सकते हैंं।
इसके बाद जब सहायक विकास अधिकारी पंचायत भोलानाथ पाठक से पूछा गया तो उन्हाेंने बताया कि ई-रिक्शा संचालन के लिए थीम विचाराधीन है। इन्हें चलाने के लिए स्वयं सहायता समूह सफाई कर्मचारी या ग्राम पंचायत स्तर पर दैनिक कर्मियों को रखने पर विचार किया जा रहा है। आचार संहिता खत्म होने के बाद ई-रिक्शा का संचालन हर हाल मे शुरू किया जाएगा।
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