चित्रकूट: महिला के पेट से निकला ढाई किलो का बालों का गुच्छा, जानें मामला
गर्भावस्था के दौरान पड़ी बाल खाने की आदत हुई जानलेवा
सीतापुर (चित्रकूट), अमृत विचार। गर्भावस्था के दौरान एक महिला को बाल खाने की लत लग गई। हालत यह हो गई कि वह बच्चे को जन्म देने के बाद भी बाल खाती रही। जब पेट में दर्द बढ़ा तो वह सद्गुरु सेवा संघ के जानकीकुंड अस्पताल पहुंची। वहां अल्ट्रासाउंड होने पर पेट में बालों का गुच्छा होने की जानकारी हुई। आपरेशन हुआ और लगभग ढाई किलो बालों का गुच्छा निकला। अब वह स्वस्थ है।
मामला महोबा जिले की एक महिला का है। इसे परिजनों ने भीषण पेटदर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया था। दरअसल कुछ दिनों पहले इसने एक बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद भी पेट में दर्द रहने लगा तो परिजनों को चिंता हुई और कई जगह इलाज कराने के बाद भी फायदा नहीं हुआ तो जानकीकुंड अस्पताल लाए। यहां वरिष्ठ सर्जन डा. पूनम आडवाणी (निर्मला गेहानी) ने इसका इलाज शुरू किया।
सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि जांचों में पेट में गांठ का मामला सामने आया। जब आपरेशन हुआ तो चिकित्सक तक दंग रह गए। महिला के आमाशय से लगभग ढाई किलो बालों का गुच्छा निकला।
परिजनों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिला को बाल खाने की आदत पड़ गई थी। जहां भी वह बाल देखती मुंह में डाल लेती। उसकी यह आदत लत के रूप में बदलती गई और बच्चे के जन्म के बाद भी यह जारी रही।
हालत यह हुई कि बालों से उसका आमाशय पूरी तरह से भर गया था। उसे लगातार उल्टियां हो रही थीं और वह कुछ खा नहीं पा रही थी। अगर समय रहते यह अस्पताल न पहुंचती तो जान भी जा सकती थी। बहरहाल, आपरेशन के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है।
ट्राइकोमेज्योर का है यह मामला
चिकित्सकों ने बताया कि बाल खाने के इस तरह के मामलों और बीमारी को ट्राइकोमेज्योर कहा जाता है। अक्सर गर्भावस्था के दौरान बाल खाने वाली महिलाएं कम उम्र की होती हैं। इसे मनोदशा का प्रभाव भी कहा जा सकता है। लगभग एक प्रतिशत मामले ही ऐसे होते हैं। डा. आडवाणी ने बताया कि उनके चिकित्सीय जीवन में अब तक ऐसे महज तीन मामले सामने आए हैं। इनमें से एक 18 साल की युवती और एक नौ साल के बच्चे का था।
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