शाहजहांपुर: हैंडपंप रिबोर घोटाले में फंसेगी कई जेई और सचिवों की गर्दन, अब जैतीपुर ब्लॉक में भी पकड़ी गई गड़बड़ी
शाहजहांपुर, अमृत विचार। हैंडपंप रिबोर घोटाले में एक बार फिर कई जेई और सचिवों की गर्दन फंसती दिखाई दे रही है। आचार संहिता के चलते ठप पड़ी जांच अब दोबारा तेजी पकड़ रही है। जिसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है। रिबोर का कार्य सचिव और जेई की देखरेख में हुआ है। ऐसे में कई सचिव और जेई की गर्दन घोटाले में फंसती दिखाई दे रही है।
पुवायां के धरमापुर गांव निवासी रामप्रवेश शुक्ला ने जैतीपुर में हैंडपंप रिबोरे में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की थी। जिसके आधार पर डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दुर्गेश यादव व जल निगम के अधिशासी अभियंता कंपिल एम सिंह को जांच सौंपी। जांच टीम ने वर्ष 2022, 23 व 24 में ब्लाक क्षेत्र में रिबोर कराए गए हैंडपंपो की सूची मांगी।
बीडीओ की ओर से डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम ने जैतीपुर क्षेत्र में किए गए 181 हैंडपंपों का स्थलीय निरीक्षण किया। जबकि शिकायतकर्ता की ओर ओर से ब्लॉक जैतीपुर के 464 हैंडपंप रीबोर कराने में घोटाला का आरोप लगाया गया है।
इसी आधार पर मामले की जांच शुरू भी की गई, लेकिन ब्लॉक कार्यालय जैतीपुर की ओर से 182 हैंडपंप रिबोर कराने की सूची दी गई, जबकि शिकायकर्ता ने बताया था कि 464 हैंडपंप रिबोर कराए गए हैं। टीम ने बीडीओ की ओर से मिली सूची के आधार पर स्थलीय निरीक्षण किया तो बोरिंग में गड़बड़ी मिली। कहीं पर सामग्री खपत से अधिक दिखाई गई तो कहीं पर कम थी। बोरिंग की गहराई, पाइप के व्यास में भी अंतर मिला। प्लेटफार्म के आकार व मानक भी सही नहीं थे। 181 हैंडपंपों की जांच में टीम को लगभग 38 रिबोर नहीं मिले हैं।
घरों में कैसे लग गए सार्वजनिक हैंडपंप
सरकारी हैंड पंप सार्वजनिक उपयोग के लिए होते हैं। इसके बाद भी जैतीपुर में जांच के दौरान पता चला कि कई हैंड पंप लोगों के घरों में लगे हैं। सरकारी हैंड पंप लोगों के घरों में कैसे लग गए यह सवाल उठ रहा है। माना जा रहा है कि हैंडपंपों को लगाने में नियमों की अनदेखी की गई। जांच टीम को कुछ हैंडपप लोगों के घरों में भी लगे मिले। जिनका सार्वजनिक उपयोग नहीं हो सकता।
इसी तरह दो हैंडपंपों के बीच न्यूनतम दूरी के मानक का भी पालन नहीं किया गया। हैंडपंप लगाने व रिबोर में हुई इस गड़बड़ी में संबंधित विभागीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई होना तय है। जांच टीम में वरिष्ठ कोषाधिकारी को भी शामिल किया गया है।
पहले भी पकड़ी गई गड़बड़ी
हैंडपंप रिबोर में पहले भी गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। इससे पहले जनवरी माह में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। शिकायत पर डीएम उमेश प्रताप सिंह ने बंडा, पुवायां और खुटार ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में जांच के लिए टीमें गठित की थीं। बंडा ब्लॉक क्षेत्र के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दुर्गेश यादव के नेतृत्व में वित्त एवं लेखाधिकारी विभा यादव, जल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार यादव को जांच का जिम्मा सौंपा गया था।
पहली जांच रिपोर्ट में बंडा के बीडीओ कार्यालय से मात्र 64 रिबोर हैंडपंपों की सूची उपलब्ध कराई गई, जिनमें 27 हैंडपंपों के रिबोर होने की पुष्टि नहीं हो सकी। 64 से अधिक हैंडपंपों का रिबोर भुगतान होना पाया गया। तब पुवायां ब्लॉक के वितौनी, नत्थापुर, भटियुरा बुजुर्ग, बंडा ब्लॉक के बनिगवां, पिपरिया हरिश्चंद्र, चरखी देवरी, मझिगई, बरगदा, ढकाघनश्याम, पट्टी छज्जूपुर, मुड़िया छावन, तिहरा ऐजनपुर, देवकली, उदरा टिकरी, मकसूदापुर, चिकटिया, नरेंद्रपुर मोहद्दीन, कुलुमजुझारपुर, बंडी, अख्त्यारपुर धौकल ग्राम पंचायतों में रीबोर हुए हैंडपंप में गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई थी।
इस मामले में कई सचिव और जेई को रिकवरी का नोटिस भी जारी किया गया था। बाद में कुछ से रिकवरी हुई भी थी। बता दें कि मामले की शिकायत जनवरी माह में डीएम से की गई थी। जनवरी माह में ही जांच शुरू हो गई थी। अब जांच अंतिम दौर में है। अब तक की जांच में 10 से ज्यादा हैंडपंप रिबोर में गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है।
आरोंपों की जांच चल रही है। कुछ जगह गड़बड़ी मिली है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी जाएगी। - दुर्गेश यादव, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट
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