बाराबंकी: बाजारों में मिलावटी तेल का बढ़ता जा रहा कारोबार, कढ़ाई में डालते ही उठ रहा तेज झाग
बाराबंकी, अमृत विचार। सरसों के तेल में मिलावट कर बाजारों में उसे बेचा जा रहा है। यह काम बाजारों में धड़ल्ले से जारी है। धंधेबाज मुनाफे के चक्कर में पाम आयल मिलाकर सरसों का तेल बेच रहे हैं। सुनियोजित तरीके से बाजारों में इसकी खेप पहुंचाई जा रही है।
अधिकतर खुले या टिन में बिकने वाले सरसों के तेल में यह मिलावट की जा रही है। सरसों का तेल शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका भले निभाता हो, मगर इसमें मिलावट कर दी जाए तो यह बड़ी बीमारियों को दावत देने लगता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बाजारों में सरसों का तेल लेते वक्त काफी सतर्क रहने की जरूरत है। फुटपाथ की दुकानें हों या घर, सरसों के तेल को कढ़ाई में डालते ही तेज झाग देते हुए लोगों ने देखा होगा। अगर तेल को कढ़ाई में डालते ही तेज झाग उठने लगे तो यह समझ लें कि घंधेबाजों ने तेल में मिलावट कर दी है। यही कारण है कि शुद्धता से सरसों का कारोबार करने वाले कारोबारी भी इन मिलावट खोरों से परेशान हैं। व्यापारियों के अनुसार सरसों के तेल में पाम ऑयल की मिलावट की जा रही है। जो पूरी तरह से प्रतिबंधित है। थोक भाव में 140 से 150 रूपए लीटर में बिकने वाले सरसों के तेल में पाम ऑयल और रिफाइंड ऑयल की मिलावट हो रही है। पाम ऑयल से तेल गाढ़ा हो जाता है, तो उसमें रिफाइंड मिलाकर उसे हल्का किया जाता है। इस काले कारोबार से जुड़े व्यापारी उसमें कलर और सेंट मिला कर बेच देते हैं।
शुद्ध सरसों का तेल मशीन से निकालकर बेचने वाले कारोबारी राजकुमार अवस्थी ने बताया कि एक क्विंटल सरसों की पेराई के बाद पैंतीस से छत्तीस लीटर सरसों का तेल निकल पाता है। सरसों की कीमत 75 रूपए प्रति किलो के आस पास है। ऐसे में एक लीटर शुद्ध सरसों के तेल की कीमत 200 रूपए लीटर के आस पास होनी चाहिए। मिलावटी तेल बाहर से बाजारों में धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा है। तेल करोबार से जुड़ें व्यापारियों की मानें तो जिले में लगभग एक करोड़ रूपए के मिलावटी तेल का रोजाना व्यापार हो रहा है।
होटल रेस्टोरेंट और ढाबों पर सबसे ज्यादा खपत
मिलावटी तेलों की खपत सबसे ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर होती है। यहां धन्धेबाज पाम आयलयुक्त सरसों का तेल भारी मात्रा में पहुंचा रहे हैं। इस व्यवसाय से जुड़े हुए कारोबारियों की जेबें मोटी होती जा रही हैं। जिले के अधिकतर होटल, ढाबे और रेस्टोरेंटों पर शुद्ध सरसों के तेल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। खुले या टीन के डिब्बे में आने वाले तेल का उपयोग किया जा रहा। इन तेलों से बने हुए खाद्य पदार्थो के सेवन से ग्राहकों की सेहत को नुकसान हो रहा है।
वर्जन-
मिलावटी तेल का सेवन करने से लीवर पर असर पड़ता है। शुरू में इसका कोई नुकसान नहीं पता चलता, पर बाद में यह असर डालता है। खानपान में अशुद्धियों के चलते ही पेट जनित बीमारी से लोग परेशान हो रहे हैं।--डा. राजेश कुशवाहा, चिकित्सा अधीक्षक
वर्जन-
विभाग के द्वारा खाद्य तेलों के नमूने निरंतर लिए जा रहे हैं। नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी की जाती है। उपभोक्ताओं के द्वारा अगर कहीं से भी किसी तरह की मिलावट की शिकायत मिलती है, तो तत्काल छापेमारी कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
--प्रियंका सिंह, एफएसडीए की सहायक आयुक्त खाद्य
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