मुरादाबाद : पूर्व महापौर हुमायूं कदीर को आवंटित आवास निगम ने कराया खाली, 24 वर्ष से अवैध तरीके से था कब्जा
कंपनी बाग के पास लिप्टन क्लब के पास आवंटित था पूर्व महापौर को आवास, अंतिम नोटिस के बाद भी खाली न होने पर निगम ने की कार्रवाई
मुरादाबाद,अमृत विचार। मुरादाबाद के पहले महापौर रहे हुमायूं कदीर के निधन के बाद भी उनके परिवार के लोगों द्वारा कंपनी बाग के लिप्टन क्लब के पास आवंटित कोठी को खाली नहीं किया था। 24 वर्ष से अवैध रूप से कब्जा कर इस आवास को खाली कराने के लिए निगम प्रशासन ने कई नोटिस दिए। लेकिन, इसके बाद भी खाली न करने पर 8 मई को निगम प्रशासन ने आवास पर अंतिम नोटिस चस्पा कर एक सप्ताह में कोठी खाली करने का आदेश दिया था। गुरुवार को अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई कर आवास निगम के कब्जे में ले लिया। इस आवास की वर्तमान में बाजार कीमत नगर निगम के अधिकारियों ने 6 से 6.5 करोड़ रुपये बताई।
नगर निगम प्रशासन ने 1995 में समाजवादी पार्टी के मुरादाबाद के प्रथम महापौर बने हुमायूं कदीर को सिविल लाइंस में कंपनी बाग के पास 661 वर्गमीटर में बना आवास आवंटित किया था। पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उन्होंने आवास खाली नहीं किया। 24 वर्ष से अवैध तरीके से रहकर कब्जा बनाए रखा। मामला कोर्ट में चलता रहा। हालांकि आवंटन की शर्त के अनुसार उन्हें पांच वर्ष के कार्यकाल की अवधि के लिए कोठी आवंटित की गई थी। लेकिन, पद से हटने के बाद भी उन्होंने इसे खाली नहीं किया। कोरोना संक्रमण से तीन साल पहले उनके निधन के बाद भी उनके परिवार के लोगों ने आवास को खाली नहीं किया।
आवास पर ताला लगा कर कब्जा बरकरार रखा था। नोटिस पर नोटिस देने के बाद भी दूसरे पक्ष ने कोई कदम नहीं उठाया। इसके बाद 8 मई को अंतिम नोटिस उनके आवास पर चस्पा कर एक सप्ताह में खाली न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। यह अवधि भी 15 मई को बीत गई। गुरुवार को अपर नगर आयुक्त प्रथम अतुल कुमार, संयुक्त नगर आयुक्त निशा मिश्रा व संपत्ति अनुभाग के अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर ताला तोड़कर कोठी को निगम के कब्जे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान मुख्य कर निर्धारण अधिकारी आरती सिंह के अलावा सहायक अभियंता रईस अहमद सहित कर व संपत्ति अनुभाग की पूरी टीम व स्थानीय पुलिस बल भी मौजूद रहा। इस कोठी की बाजार में वर्तमान कीमत 6 से 6.50 करोड़ रुपये निगम के अधिकारियों ने बताई है।
अंतिम नोटिस की भी की अनदेखी
अपर नगर आयुक्त व वरिष्ठ प्रभारी संपत्ति अधिकारी की ओर से 8 मई को पूर्व महापौर हुमायूं कदीर की कोठी पर नोटिस चस्पा कर एक सप्ताह में खाली करने के लिए आदेश दिया था। ऐसा न होने पर नगर निगम के द्वारा एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए आवास पर कब्जा करने की चेतावनी भी दी थी। लेकिन इसके बाद भी उनके परिवार की ओर से इसे खाली नहीं किया गया। जिसके बाद गुरुवार को नगर निगम की टीम ने आवास खाली कराने की कार्रवाई की।
1995 में बने थे मुरादाबाद के पहले महापौर
मुरादाबाद नगर निगम का गठन होने के बाद सपा के हुमायूं कदीर 1995 में पहली बार महापौर बने थे। वह पांच साल तक पद पर रहे। इस दौरान उनको रहने के लिए आवास आवंटित किया गया था। कार्यकाल समाप्त होने और कोरोना संक्रमण की वजह से तीन वर्ष पहले निधन के बाद भी उनके परिवार की ओर से आवास खाली नहीं किया गया। जबकि महानगर के बड़ा शाह सफा, नई बस्ती तहसील स्कूल के पास उनका पैतृक आवास है।
पूर्व महापौर को उनके कार्यकाल तक के लिए आवास आवंटित था। लेकिन, उन्होंने पद से हटने के बाद भी इसे खाली नहीं किया था। यही नहीं उनके निधन के बाद उनके परिवार वालों ने कोठी पर कब्जा बनाए रखा। कई बार नोटिस दिया गया। 8 मई को अंतिम नोटिस दिया गया था। इसके क्रम में निगम की टीम ने कार्रवाई कर आवास पर कब्जा ले लिया है। कार्रवाई के दौरान आए पूर्व महापौर के दामाद व पुत्री को भवन में रखा सभी सामान सौंप दिया। निगम प्रशासन ने इस कोठी का कब्जा अपने प्राधिकार में ले लिया है।- अतुल कुमार, अपर नगर आयुक्त
