Bareilly News: पैतृक संस्था की अनुमति बगैर कुलपति बने हैं प्रो. केपी सिंह, वेतन रोकें वित्त अधिकारी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह पर नियमविरुद्ध ढंग से कार्यभार संभालने का आरोप लगाते हुए सेवानिवृत्त प्रो. एके जेटली ने वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर उनका वेतन रोकने की मांग की है।

प्रो. जेटली ने पत्र में लिखा है कि प्रो. केपी सिंह 16 अगस्त 2023 को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में दूसरे कार्यकाल के लिए कुलपति नियुक्त हुए। इसके बाद छह महीने के लिए सशर्त उनकी प्रतिनियुक्ति बढ़ाई गई, लेकिन 2 सितंबर 2023 को ही प्रो. केपी सिंह ने दोबारा पत्र लिखकर 21 अगस्त 2025 तक प्रतिनियुक्ति विस्तारित करने का अनुरोध किया जिसे पैतृक संस्था गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के कुलपति ने स्वीकार योग्य नहीं माना। 

वहां के कार्य मुख्य कार्मिक अधिकारी ने 13 अक्टूबर 2023 को प्रो. केपी सिंह को पत्र लिखा कि वह 11 फरवरी को प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने के बाद पंत विश्वविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करें लेकिन प्रो. सिंह वहां कार्यभार ग्रहण करने के बजाय बिना प्रतिनियुक्ति अवकाश रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार अवैध तरीके से संभाले रहे।

प्रो. जेटली के पत्र में कहा गया है कि प्रो. केपी सिंह ने प्रतिनियुक्ति अवधि 31 अगस्त 2026 तक विस्तारित करने का दोबारा अनुरोध किया, मगर उसे भी पैतृक संस्थान ने अस्वीकार कर दिया और उन्हें फिर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने का आदेश दिया। इसलिए 15 फरवरी के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति को वेतन का भुगतान अवैधानिक है। उन्होंने वित्त अधिकारी से प्रो. के पी सिंह का वेतन बंद करने के साथ 16 फरवरी के बाद उन्हें किया गया भुगतान वापस लेने की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शासन को भी भेजी है।

प्रो. एके जेटली के आरोप निराधार हैं। उनके खिलाफ जांच चल रही है, इसलिए वह दबाव बनाने के लिए इस तरह के पत्र लिखते रहते हैं। कुलपति की प्रतिनियुक्ति बढ़ाने के लिए अप्रैल में पत्र लिखा गया था। - डॉ. अमित सिंह, मीडिया प्रभारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय

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