Kanpur News: अब मेडिकल कॉलेज में भी होगी किडनी रीनल बायोप्सी, सैकड़ों मरीजों को मिलेगी राहत, इलाज में होगी आसानी
कानपुर, अमृत विचार। किडनी की खराबी का मुख्य कारण उसकी छन्नी का सही तरह से काम न करना है। इस खराबी का पता करने के लिए किडनी की रीनल बायोप्सी की भूमिका अहम होती है। अभी रीनल बायोप्सी की सुविधा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में नहीं है। अब जीएसवीएम की पैथोलॉजी में भी बायोप्सी हो सकेगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल की ओपीडी, जीएसवीएसएस पीजीआई और उर्सला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 60 से अधिक मरीज किडनी की समस्या लेकर पहुंचते हैं, जिनमें कुछ मरीजों को रीनल बायोप्सी की भी जरूरत पड़ती है। अब इसकी जांच जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में ही हो सकेगी।
इसकी तैयारी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला और पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.महेंद्र सिंह ने शुरू कर दी है। प्राचार्य प्रो.संजय काला ने बताया कि रीनल बायोप्सी जांच की सुविधा शुरू होने से सैकड़ों किडनी रोगियों को राहत मिलेगी। एसजीपीजीआई के सहयोग से जीएसवीएम में रीनल बायोप्सी की जांच होगी।
बायोप्सी से अच्छे इलाज की योजना में मिलती मदद
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ.समीर गोविल ने बताया कि किडनी की कई परेशानियां ऐसी होती हैं,जिसका पता लगाकर केवल दवा से ही इलाज संभव है। कई बार किडनी के फिल्टर में सूजन हो जाती है। प्रत्यारोपित किडनी की सफलता का पता लगाने के लिए भी बायोप्सी करानी होता है। बायोप्सी की रिपोर्ट से अच्छे इलाज की योजना बनाने में भी मदद मिलती है।
विशेषज्ञ ने किया पीजी छात्रों को प्रशिक्षित
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.महेंद्र सिंह ने बताया कि बीते दिनों एसजीपीजीआई के विशेषज्ञ डॉ. राम नवल राव आए थे। उन्होंने किडनी बायोप्सी की जांच के संबंध में पीजी छात्र-छात्राओं को कई जानकारियां दी थीं। वर्कशाप के माध्यम से पीजी छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित कर एसजीपीजीआई की मदद से जीएसवीएम में भी किडनी की रीनल बायोप्सी की जांच कराई जाएगी।
