प्रयागराज : बारा में सरकारी हैण्डपंप से पानी के बदले निकल रही गर्म हवाएं

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Edited By Amrit Vichar
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पठारी क्षेत्र में  बूंद बूंद पानी को भटक रहे लोग, पशु-पक्षी भी बेहाल

बारा/ नैनी, अमृत विचार।  जून के महीने में लगातार बढ़ रहे पेयजल संकट से जहां पठारी क्षेत्र में रहने वाले लोग अब पीने के पानी के लिए काफी जद्दोजहद में हैं। वहीं शासन के द्वारा लगाए गए सरकारी हैंड पंपों से पानी की जगह गर्म हवा निकल रही है। जबकि कई बस्तियों के लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए गड्ढें में एकत्र दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। वहीं दूसरी तरफ जल निगम विभाग के द्वारा भी कई गांवों में पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं की जा रही है। जिसके कारण प्रभावित बस्तियों में रहने वाले लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की व्यवस्था करने में दूर दूर तक भटकते रहते हैं।

गर्मी में होने वाले पेयजल संकट को लेकर पाठा क्षेत्र के लोगों के दर्द के आगे तमाम कोशिशें और दावे बेमानी साबित हो रहे हैं। पानी के गंभीर संकट से जूझ रहे सोनवर्षा, नारीबारी, बारा,शंकरगढ़,लालापुर, क्षेत्र की कई बस्तियों के लोगों की पीड़ा को इससे ही समझा जा सकता है कि जून के महीने में महिलाओं को पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। जरूरत भर पानी के इंतजाम में ही उनका पूरा दिन गुजर जाता है। परिवार का एक सदस्य मजदूरी के लिए भी नहीं जा पाता। इसी वजह से उनके परिवार के भरण पोषण का भी संकट इस गर्मी में खड़ा हो गया है।

बारा, शंकरगढ़ और लालापुर क्षेत्र की बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर परिवार की महिला एवं पुरुष दोनों मजदूरी करके गुजर-बसर करते हैं। लेकिन महिलाओं का पूरा दिन पानी इकट्ठा करने में ही निकल जा रहा है।  पानी की परेशानी सुनाते हुए सोनवर्षा आदिवासी बस्ती की राधा आदिवासी की आंखें भर आईं। बोलीं, पानी की वजह से दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है। जबकि गर्मी के कारण तालाब व कुएं भी पूरी तरह से सूख चुके हैं जिससे पशु पक्षियों को भी पीने के पानी की समस्या हो रही है।

अगर देखा जाए तो नारीबारी क्षेत्र सहित शंकरगढ़ नगर पंचायत में सैकड़ो हैंड पंप नगर पंचायत विभाग के अलावा अन्य विभागों के द्वारा भी लगाए गए हैं, जिन में 100 से 125 फीट तक की पाइप लगाई गई है। लेकिन जून के महीने में वाटर लेवल 250 से 300 फुट के नीचे हो चुका है। जिससे नगर पंचायत में भी पेयजल का संकट जून के महीने में गहराया हुआ है। शंकरगढ़ नगर में काफी धरना प्रदर्शन के बाद नारीबारी जलनिगम से बीस किलोमीटर दूर तक पेयजल आपूर्ति किया जा रहा है।

नगर पंचायत में जलापूर्ति करने के लिए नारीबारी क्षेत्र के दर्जनों गांवों की आपूर्ति बन्द कर दी जाती है। गन्ने, सुरवल सहनी, कोहड़िया आदि गांवों में पूर्व में भी गर्मियों में टैंकर से पानी पहुंचाया जाता था, किन्तु चुनावी वर्ष होने के कारण अब तक उस ओर किसी भी अधिकारी कर्मचारी के ध्यान नहीं देने से लोग बूंद बूंद पानी को परेशान हैं। नहरें भी नहीं चलने से जल स्तर दिन पर दिन घटता जा रहा है। वहीं बारा तहसील के शिवराजपुर, गाढ़ा कटरा, जनवा, बिहरियां ,गढ़वा आदि गांवों में सिलिका सैंड वॉशिंग का कार्य किया जा रहा है। जिसके कारण वाशिंग प्लांट संचालकों के द्वारा 500 से 600 फीट गहरे बोर कराए गए हैं।

जिससे शंकरगढ़ क्षेत्र में वाटर लेवल अत्यधिक नीचे चले जाने से पीने के पानी की समस्या शंकरगढ़ व आसपास के गांवों में बनी हुई है। लगातार वाशिंग प्लांटों पर किए जा रहे भूगर्भ जल दोहन के कारण पेयजल संकट गहराता ही जा रहा है।  लोहगरा, नीबी की रहने वाली रामरती देवी, गीता देवी, सावित्री आदिवासी सहित अन्य महिलाओं के द्वारा बताया गया कि गांव में पीने के पानी के लिए प्रधान के द्वारा पानी के टैंकर लगवाए गए हैं। जिससे सुबह शाम टैंकर से पानी आने के कारण ही उन्हें पीने का पानी मिल पा रहा है। जिसके लिए वह लोग घंटों पानी के लिए लाइन में खड़ी रहती हैं। क्षेत्रीय नागरिक महेन्द्र शुक्ल, सुधाकर सिंह, वितेंद्र पाण्डेय, प्रधान दिनेश मिश्र, सन्तोष सिंह, विसम्भर मिश्र,पृथ्वीराज साहू, प्रदीप मिश्र, दिवाकर सिंह आदि ने अविलंब पेयजल समस्या के समुचित निवारण की मांग किया है।

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