पुलिस की फाइनल रिपोर्ट पर सीडब्लूसी ने उठाया सवाल, पढ़िए बहराइच का ये पूरा मामला
पाक्सो के मामले में पीड़िता के बयान की अनदेखी कर पुलिस ने लगा दिया फाइनल रिपोर्ट, सीडब्लूसी की पीठ ने डीजीपी को कार्रवाई को लेकर भेजी संस्तुति
बहराइच, अमृत विचार। नानपारा कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी भाई ने अपनी सौतेली बहन के साथ कई बार दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। सीडब्लूसी न्यायपीठ के हस्तक्षेप के बाद मामले में थाने की पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन कार्रवाई करने के बजाए विवेचक द्वारा मुकदमें में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया। पीड़िता के मामले में लगाई गई फाइनल रिपोर्ट पर सीडब्लूसी की पीठ ने सवाल उठाते हुए विवेचना अधिकारी व पर्यवेक्षक के खिलाफ डीजीपी को कार्रवाई के लिए अपनी संस्तुति भेजी है।
कोतवाली नानपारा क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी नाबालिग बालिका ने अपने सौतेले भाई पर नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। मामले में थाने की पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर पीड़िता ने सीडब्लूसी की पीठ पर बीते एक अप्रैल को प्रर्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। सीडब्लूसी न्यायपीठ के हस्तक्षेप के बाद थाने की पुलिस ने घटना में पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। मामले में पीड़िता के बयान आदि के बाद बालिका के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अब नानपारा कोतवाली विवेचनाधिकारी ने घटना में पीड़िता के बयान को दरकिनार कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पीड़ित बालिका ने बृहस्पतिवार को इसकी शिकायत सीडब्लूसी न्यायपीठ से की। मामले में सीडब्लूसी के अध्यक्ष सतीश श्रीवास्तव, सदस्यगण श्रवण कुमार शुक्ला, दीपमाला प्रधान, नवनीत मिश्रा व अर्चना पांडेय ने सुनवाई करते हुए मुकदमें में विवेचनाधिकारी के कृत्य को काफी गंभीर व गैर जिम्मेदाराना करार दिया।
न्यायपीठ ने मामले में कोतवाली नानपारा के प्रभारी निरीक्षक व घटना के विवेचनाधिकारी को 14 जून को न्यायपीठ पर तलब किया है। न्यायपीठ के अध्यक्ष ने मामले में पाक्सो के अभियुक्तों को लाभ पंहुचाने को लेकर संबंधित विवेचक व पर्यवेक्षण अधिकारी/सीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपनी संस्तुति डीजीपी को भेजी है। भेजी गई संस्तुति में अध्यक्ष ने कहा है कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा दुष्कर्म के मामले में पीड़िता के साक्ष्य को शीर्ष स्थान पर रखा गया है, लेकिन इसके विपरीत विवेचक व पर्यवेक्षण अधिकारी ने पीड़िता के बयान को दरकिनार कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट पर सौंप दी है। यह नियम विरूद्ध है। इनके खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की संस्तुति की जाती है।
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