Bareilly News: दूषित पानी से बंजर हो रहे खेत मगर इफ्को को नहीं दिखता किसानों का दर्द

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Edited By Amrit Vichar
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प्रदीप यादव/अतीक खान, बरेली, अमृत विचार। हमारा गांव बर्बाद हो गया, खेत-खलिहान उजड़ गए और दूषित पानी से पशु मर रहे हैं। एक दिन बीमारियां हमें भी खा जाएंगी। फैक्ट्री से कोई फायदा नहीं हुआ। 

हमारी जमीनें भी ले लीं गईं लेकिन बदले में केमिकल युक्त दूषित पानी, घटता जलस्तर और बंजर होते खेतों का तोहफा मिला है। यह दर्द नौगवां गांव के राम दयाल सहित कई किसानों का है। किसानों का कहना है कि अगर इफ्को प्रबंधन उनकी समस्याएं समझता, तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती।

आंवला के आलमपुर जाफराबाद में इफ्को का प्लांट है। इसके आवासीय कैंपस से सटी ऊबड़-खाबड़ सड़क नौगंवा समेत दूसरे गांवों को जोड़ती है। इस मार्ग के किनारे कई खेत और तालाब हैं, जिनमें फर्क करना मुश्किल है कि खेत कौन सा है और तालाब कौन। किसानों का आरोप है कि यहां फैक्ट्री का पानी भरा है। ग्रामीण बलवीर कहते हैं कि अभी फिर भी गनीमत है। बारिश के मौसम में हालत बद से बदतर हो जाते हैं। गांवों में मच्छर और बीमारियां फैलती हैं। हम बस इतना ही चाहते हैं कि दूषित जल संकट से छुटकारा दिलाया जाए।

जलस्तर लगातार जा रहा नीचे
इफ्को प्लांट परिक्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गांव दूषित पानी, घटते जलस्तर और बीमारियों से परेशान हैं। दो गांवों के ग्राम प्रधानों ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि क्षेत्र का जो नुकसान हुआ है, वह किसी से छिपा नहीं है। जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। छोटी जोत के किसानों के पास सिंचाई के लिए नलकूप नहीं हैं। कई गांवों के लोग अरिल नदी के पानी से फसलें सींचते हैं। नदी का पानी दूषित होने के कारण कभी-कभार फसलें खराब हो जाती हैं।

2018 में ब्लॉक से मांगा गया था स्पष्टीकरण
वर्ष 2018 में आलमपुर-जाफराबाद के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख आदेश सिंह यादव की अध्यक्षता में क्षेत्र पंचायत की बैठक में एक आदेश पारित हुआ था, जिसमें ब्लॉक ने इफ्को प्लांट को यहां के गिरते जलस्तर का जिम्मेदार मानते हुए स्पष्टीकरण तलब किया था। तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख ने मंडलायुक्त को दिए शिकायती पत्र में फैक्ट्री का दूषित पानी खेतों में जाने, उससे बीमारियां फैलने और वाटर-लेवर का मुद्दा उठाया था। 

इस मांग के साथ कि इफ्को को हर ग्राम पंचायत में कम से कम 10-10 इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाने चाहिए और खेतों में पानी छोड़ना बंद करना चाहिए। जून 2018 में जिला पंचायत कार्यालय ने भी एक ऐसा ही प्रस्ताव पारित करके इफ्को प्रबंधन को भेजा था। हालांकि इफ्को प्रबंधन का दावा है कि अब स्थिति वैसी नहीं है। दूषित पानी रिसाइकिल करके, बागवानी में उपयोग किया जा रहा है।

इफ्को क्षेत्र में जल प्रदूषण पर अध्ययन जरूरी
मध्यप्रदेश के डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति और एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस की प्रो. नीलिमा गुप्ता ने बरेली परिक्षेत्र में जल प्रदूषण पर काफी शोध किए हैं। वह कहती हैं कि इफ्को क्षेत्र में जल प्रदूषण पर अध्ययन बहुत जरूरी है। फर्टिलाइजर प्लांट होने के नाते यह देखना चाहिए कि यहां जमीन और पानी में केमिकल्स का प्रभाव तो नहीं है। अगर केमिकल वाला पानी खेत-तालाबों में जाता है, तो निश्चित रूप से चिंताजनक होगा।

दूषित पानी से हो सकती हैं बीमारियां
प्रदूषित पानी का सेवन सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इससे कैंसर, लकवा, हृदयरोग के साथ ही गुर्दा और लिवर खराब हो सकता है। खाज-खुजली और चर्मरोग जैसी बीमारियां फैलने लगती हैं। इसके नकारात्मक परिणाम कुछ ही दिन में सामने आने लगते हैं। व्यक्ति धीरे-धीरे सुस्त होने लगता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

वेस्ट वाटर रीसाइकिल करके वानकी क्षेत्र में किया जा रहा उपयोग
इफ्को प्रबंधन के पीआरओ विनीत शुक्ला का कहना है कि किसानों के आराेप झूठे हैं। वेस्ट वाटर को रीसाइकिल करके वानकी क्षेत्र में उपयोग किया जा रहा है। प्लांट से एक किलोमीटर की दूरी पर लगे 150 से 200 पेड़-पौधों में पानी लगाया जा रहा है। रीसाइकिल किए हुए पानी के इस्तेमाल से अच्छे परिणाम मिले हैं। किसानों के विरोध के बाद फैक्ट्री से किसी भी प्रकार का पानी खेतों में नहीं छोड़ा जा रहा है।

किसानों से बातचीत
नौगवां के रहने वाले किसान कृष्ण का खेत प्लांट के पास है, जो 1984 से अब तक दूषित पानी बंजर बन गया है। खेत में किसी भी प्रकार की कोई भी फसल नहीं उगती है। विरोध करने पर प्लांट से पानी निकालना बंद हो जाता है। कुछ दिन बाद फिर शुरू कर देते हैं।

तीरथपुर के रहने वाले सुरेश का कहना है कि प्लांट प्रबंधन दूषित पानी को उनके खेतों में छोड़ देता है। जिसकी बजह से फसल नहीं हो पा रही है। ज्यादा रासायनिक खाद युक्त दूषित पानी के इस्तेमाल से फसल सूख जाती है।

सेंधी-सेंधा के किसान रामविलास का आरोप है कि फैक्ट्री से थोड़ी दूरी पर ही उनका खेत है। जहां पर एक नलकूप लगा है। जिसका पानी नमकीन होने लगा है। जिससे फसल में काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

नौगवां के खुशीराम ने बताया है कि दूषित पानी से खाज-खुजली और चर्मरोग जैसी बीमारियां हो रही हैं। प्लांट के आसपास के लोग बहुत परेशान हैं। प्लांट से केमिकल युक्त पानी बहता है जो खेत में इकट्ठा हो जाता है। फिर बीमारियां फैलने लगती हैं।

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