बाराबंकी: हवाहवाई हुए दावे, अब तक नहीं हुआ प्राचीन बड़ा शिवाला मंदिर का कायाकल्प
सतरिख/बाराबंकी, अमृत विचार। नगर पंचायत के कायस्थाना मोहल्ले में स्थित प्राचीन बड़ा शिवाला मंदिर का कायाकल्प आखिर कब होगा। यह सवाल श्रद्धालुओं के जहन में रह रहकर कौंध रहा है। कायाकल्प के लिए कई बार बैठके हुईं। लंबे चौड़े दावे किए गए। लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। अब मंदिर जर्जर होकर अपनी पहचान खोने लगा है।
कायस्थाना मोहल्ले में करीब 230 वर्ष पुराना प्राचीन शिव मंदिर है। जो बड़ा शिवाला के नाम से प्रख्यात है। मरम्मत और देखरेख के अभाव में मंदिर जर्जर हो गया है। दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है। झाड़िों के साथ ही पेड़ पौधे उग आए हैं। कई स्थानों पर मंदिर टूट भी गया है। जर्जर मंदिर का कायाकल्प कराने को लेकर मोहल्ले में कई बार बैठके हुईं। बैठक में व्यापारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न पार्टियों से जुड़े लोग भी मौजूद रहे। कुछ लोगों ने मंदिर कायाकल्प को लेकर लंबे चौड़े दावे किए। किसी ने कहा था हम सरिया देंगे, कोई सीमेंट तो कुछ लोग बालू सहित अन्य निर्माण सामग्री और पैसा देने के लिए आगे आए। लेकिन समय बीता और बात जैसे तैसे खत्म हो गई। मंदिर का कायाकल्प तो दूर रहा झाड़ियां तक नहीं साफ हो सकीं।
बता दें कि इसके पहले नगर पंचायत अध्यक्ष रेहान कामिल ने जनता की मांग पर लोगों के सहयोग से सतरिख चिनहट मार्ग पर देवघर माता मंदिर द्वार का मुख्य गेट भव्य रूप से बनवाया था। वहीं सभासद दीपेश श्रीवास्तव का कहना है कि इस मंदिर में 10 लाख रूपये की लागत से मरम्मत, रंगाई-पुताई एवं जीर्णोधार होना है। आगामी बैठक में करीब पांच लाख रूपये का चंदा इकठा हो रहा है। उसके बाद जल्द ही निर्माण शुरू होगा।
