बरेली: फसल अवशेष जलाने से प्रकृति और मानव दोनों को नुकसान

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बरेली/बहेड़ी, अमृत विचार। फसल अवशेष को लेकर शासन व जिला प्रशासन सख्त है। इसको लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को एसडीएम बहेड़ी के नेतृत्व में लाउडस्पीकर के माध्यम से बहेड़ी तहसील के गांव जवाहरपुर, रेतवाड़ा, हुलासपुर, ढकिया पट्टी, अखा आदि गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसमें किसानों …

बरेली/बहेड़ी, अमृत विचार। फसल अवशेष को लेकर शासन व जिला प्रशासन सख्त है। इसको लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को एसडीएम बहेड़ी के नेतृत्व में लाउडस्पीकर के माध्यम से बहेड़ी तहसील के गांव जवाहरपुर, रेतवाड़ा, हुलासपुर, ढकिया पट्टी, अखा आदि गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया।

इसमें किसानों से फसल अवशेष (पराली) ना जलाए जाने के साथ ही डी-कंपोजर के माध्यम से फसल अवशेषों को सड़ाकर उसकी गुणवत्तायुक्त देशी खाद बनाने की अपील की गई। किसानों को कृषि रक्षा इकाई बहेड़ी में निशुल्क डीकंपोजर भी वितरित किए।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी अर्चना प्रकाश वर्मा ने किसानों से अपील की वे धान कटाई के बाद फसल अवशेष को आग न लगाएं। खेतों में फसल अवशेष जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। मिट्टी में नमी कम हो जाने से जमीन के बंजर होने का खतरा बढ़ जाता है। फसल अवशेष को जलाने से विभिन्न प्रकार के लाभदायक सूक्ष्मजीव और मित्र कीट के अंडे आदि होते हैं, जो आग में भस्म हो जाते हैं।

इसलिए फसल अवशेष को जलाने की बजाए खेत में ही खाद के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी है। यह भी कहा कि फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों को आसान दर पर उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कस्टम हायरिग सेंटर (सीएचसी) खोले हैं, ताकि यहां से किसान कम दरों पर यंत्र ले सकें।

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