लखनऊ में अकीदत के साथ मनाई गई ईद ए गदीर, प्रमुख मस्जिदों में पढ़ी गई नमाज, जगह-जगह लगी सबीलें 

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। मौला अली के ऐलान ए विलायत पर ईद ए गदीर पर्व अकीदत के साथ मनाया गया। लोगों ने नए कपड़े पहने और अपने घरों में महफिल व नज्र का आयोजन किया। शहर की 110 मस्जिदों में ईद ए गदीर की नमाज अदा हुई। बड़ी नमाज सुबह 11 बजे मस्जिद ए कूफा में हुई। पुराने शहर के कई इलाकों में लोगों ने सबील लगा कर सिवई, शर्बत, मेवा, मिठाई आदि वितरित की। रोशनी से सजे इमामबाड़ों का नजारा अलग ही था।

रौज ए काजमैन में ईद-ए-गदीर की प्रमुख नमाज अदा की गई। नमाज मौलाना अबु इफ्तेखार जैदी ने पढ़ाई। महफिल को खिताब करते हुए मौलाना ने कहा कि आज ही के दिन हजरत मोहम्मद साहब ने गदीर के मैदान में हजारों हाजियों के हुजूम में हजरत अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उधर, अजाखाना ए जव्वार हुसैन में महफिल का आयोजन किया गया। महफिल को मौलाना मोहम्मद शफीक आब्दी ने खिताब किया। वहीं पैगाम-ए-इंसानियत कमेटी की ओर से मस्जिद मोलसिरी नक्खास में नमाज जश्ने गदीर मनाया गया। महफिल को मौलाना मिर्जा यासूब अब्बास ने खिताब किया। वहीं, मौलाना शाहकार जैदी ने जामा मस्जिद में नमाज पढ़ाई और शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने भी नमाज अदा कराई।

मौला अली की शान में पढ़े गए कसीदे
जायरीन बाबुल मुराद कमेटी की ओर से इमामबाड़ा आगा बाकर चौक में महफिल का आयोजन हुआ। इसे मौलाना मीसम जैदी ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि गदीर को ईद-ए-अकबर भी कहते हैं, यानि ये सबसे बड़ी ईद है। महफिल के बाद शायरों ने मौला अली की शान में कसीदे पढ़े। साथ ही बड़ी संख्या में गैस के गुब्बारे छोड़े गए। वहीं, इमामबाड़ा उम्मुल बनीन मंसूर नगर में महफिल का आयोजन हुआ। कर्बला अजीम उल्ला खां ताल कटोरा मार्ग पर अंजुमने गुलदस्ते इमामे रिजा ने जश्ने गदीर शीर्षक से महिलाओं की एक महफिल का आयोजन किया। इसमें मारिया आलम, सायरा बीबी, अहमन बीबी और महमूना सहित अन्य महिलाओं ने हजरत अली की शान में अपने कलाम पेश किये।

शिया हुसैनी फंड ने निकाला गदीरी जुलूस
आल इण्डिया शिया हुसैनी फंड की ओर से रूस्तम नगर स्थित शबीह नजफ से गदीरी जुलूस निकाला गया। ये दरगाह हजरत अब्बास, रौजाए फातमैन और बैतुल हुज्न परिसर में समाप्त हुआ। जुलूस में अकीदतमंद बैनर लिए थे, इसमें ईद-ए-गदीर मुबारक लिखा था। जुलूस के दौरान नारे हैदरी या अली की सदाएं भी लगाई गईं। इससे पहले हुए महफिल को मौलाना अब्बास इरशाद, मौलाना जाफर अब्बास ने खिताब किया।

जगह-जगह लगे सबील और लंगर
नख्खास, सआदतगंज, दरगाह हजरत अब्बास, हुसैनाबाद व कश्मीरी मोहल्ला में जगह-जगह सबील और लंगर का आयोजन किया गया। यहां पर अकीदतमंदों ने शर्बत, सिवईं, मिठाई, चाट, पूरी, छोला, मेवा, जूस और अन्य खाद्य पदार्थों का वितरण किया।

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