बाराबंकी : राजस्थान' का जिप्सम बढ़ाएगा खेत की उर्वरा शक्ति
नई व्यवस्था के तहत किसानों को मिलेगा 75 प्रतिशत का अनुदान
खेतों की गहरी जुताई करने के बाद डाला जाता है जिप्सम
बाराबंकी, अमृत विचार। किसानों द्वारा रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग करने से जमीन की उर्वरक क्षमता लगातार गिर रही है। इसका असर फसलों की पैदावार पर भी पढ़ती है। कृषि विभाग मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए राजस्थान से 244 मीट्रिक टन जिप्सम मंगवाया है। राजकीय बीज भंडारों पर अनुदानित दामों पर किसानों में इसक वितरण किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि अब तक 80 से 90 प्रतिशत वितरण भी हो चुका है।
बीते वर्ष तक सरकार की ओर से किसानों को 75 फीसदी अनुदान पर जिप्सम दिया जाता था। इसके लिए किसानों को पहले पूरा पैसा जमा करना होता था। मगर, इस वर्ष नई व्यवस्था के तहत अनुदानित दाम तत्काल किसानों को मिल जाएगा। अब उन्हें सिर्फ 25 प्रतिशत धनराशि ही देनी पड़ेगी। विभाग के अनुसार, 244 मीट्रिक टन जिप्सम पहुंच चुका है। इसे राजकीय बीज गोदामों पर भेज दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार खेतों की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए जिप्सम का प्रयोग फसल की बुवाई से पहले करना चाहिए। खेत को जरुरत के अनुसार, गहरी जुताई कर तैयार करने के बाद ही उसमें जिप्सम डाला जाता है। खड़ी फसल में इसकी बुवाई नहीं करनी चाहिए। जानकार बताते हैं कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन में कैल्शियम व सल्फर मुख्य अपव्यय माने जाते हैं।
इनमें जिप्सम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। खनिज होने के बाद भी यह खेतों में उर्वरक के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिप्सम में 29.4 प्रतिशत कैल्शियम और 23.5 प्रतिशत सल्फर होता है। यह आयरन बनाता है। इससे मिट्टी की रासायनिक व भौतिक अवस्था में सुधार होता है। जिला कृषि अधिकारी राजित राम ने बताया कि खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए राजस्थान से जिप्सम मंगाया गया है। जिसे सभी राजकीय बीज गोदामों में रखवाकर किसानों को वितरण किया जा रहा है। किसानों को 75 प्रतिशत तत्काल अनुदान दिया जा रहा है।
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