किसानों पर छाए संकट के बादल : ड्रेन की सफाई न होने से डूबेगी धान की फसल
बारिश को लेकर जल निकासी का नहीं हो कोई बंदोबस्त
देवा, बाराबंकी: अमृत विचार। जलनिकासी का प्रमुख साधन संखिनी ड्रेन की सफाई न होने से पिछले वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेल चुके क्षेत्रवासियों को इस बार भी काफी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। बीते वर्ष जल भराव की भयावह स्थिति होने के बाद भी संबंधित विभाग मौन बना हुआ है। जिसके चलते किसानों को फसल डूबने की चिंता सता रही है।
देवा क्षेत्र की सलारपुर झील से निकलने वाली संखिनी ड्रेन सद्दीपुर क्षेत्र के हेतमपुर गांव के पास कल्याणी नदी में गिरती है। करीब पंद्रह किलोमीटर लंबी यह ड्रेन क्षेत्र के सलारपुर, ढिढोरा, देवा, उसरी, ककरहा, अकटहिया, विनवा ग्राम, बीकर, जगदीशपुर, मलूकपुर, उजेरियां, जानीपुर, कुसुम्भा, बरबास, अजगना, अनखा, इनायतपुर, मड़वा, बुढ़नपुर, देवगांव और सद्दीपुर गांवों की जलनीकासी का प्रमुख साधन है। इस ड्रेन की सफाई न होने के कारण क्षेत्रवासियों को इस बार भी फसल डूबने की चिंता सताने लगी है। इसकी सफाई हो जाने से किसानों की हजारों बीघा फसल जलमग्न होने से बच सकती है।
कुछ वर्ष पूर्व इसकी सफाई संबंधित विभाग द्वारा कराई गई थी लेकिन उसमे भी रस्म अदायगी की गई। जिसके चलते बीते वर्ष बरसात में किसानों को काफी नुकसान हुआ था। सलारपुर के किसान शान बहादुर सिंह बताते हैं कि खजुहा झील के किनारे करीब तीन हेक्टेयर खेत हैं। जिसमे प्रत्येक वर्ष धान की फसल डूब जाती है। क्षेत्र के अकटाहिया गांव निवासी छोटे सिंह बताते है कि यदि सलारपुर से बीकर गांव तक ड्रेन की सफाई हो जाए तो काफी हद तक फसल को बचाया जा सकता है।
