आरटीईः 1.65 लाख चयनित बच्चों में सिर्फ 72 हजार को ही दिया प्रवेश, शिक्षा महानिदेशक ने सभी जनपदों के डीएम को लिखा पत्र, बीएसए को दिए कार्रवाई के निर्देश

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

लखनऊ, अमृत विचार: अभिभावकों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से राइट टू एजुकेशन यानी की आरटीई कानून लाया गया। जिससे आर्थिक रूप से असमर्थ लोगों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल पाए, लेकिन आरटीई के तहत चयनित गरीब बच्चों के भविष्य से बड़े प्राइवेट स्कूल खिलवाड़ करने पर आमादा हैं। मनमानी का आलम ये है कि राजधानी सहित प्रदेश भर में इस बार 1.65 लाख बच्चों का आरटीई के तहत चयन हुआ है लेकिन अभी तक इसमें प्रवेश सिर्फ 72 हजार बच्चों को ही दिया गया है, अभी 93 हजार बच्चों का प्रवेश होना बाकी है। जबकि नए सत्र की पढ़ाई पहली जुलाई से ही शुरू हो गई है।

स्कूल वाले कर रहे परेशान
माता-पिता अच्छी शिक्षा देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। दिन-रात एक करने के बाद भी उन्हें हर साल एक ही परेशानी झेलनी पड़ती है कि लॉटरी में नाम आने के बाद भी प्राइवेट स्कूल वाले एडमिशन नहीं दे रहे हैं। इसके लिए वे तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। प्राइवेट स्कूल आरटीई को दरकिनार कर देते हैं और अपनी अलग ही मनमानी करते हैं। उनके बहानों के चलते अभिभावक स्कूल और बीएसए ऑफिस के चक्कर काटने पर मजबूर होते हैं। प्राइवेट स्कूल कई बार अभिभावकों को कागजी कार्रवाई में भी उलझा देते हैं। कई बार स्कूलों का तर्क होता है कि बच्चे के डॉक्यूमेंट पूरे नहीं हैं, जिसकी वजह से एडमिशन नहीं हो सकता है।

स्कूल्स के बहाने

-डॉक्यूमेंट पूरे नहीं है
-उम्र में गड़बड़ है
-नाम की स्पेलिंग ठीक नहीं है
-हमारे स्कूल में सीट फुल हो हैं
-आधार कार्ड में दिया पता अलग है
-एडमिशन क्लोज हो गए हैं
-अभी स्कूल में टीचर नहीं है, कल आना
-गलत वार्ड है, जिस वार्ड में रहते हैं, उस वार्ड में स्कूल नहीं हैं
-दूसरे जिले के रहने वाले हैं, यहां पर किराए पर रहते हैं। इसकी वजह से एडमिशन नहीं दे सकते हैं।

इस आंकड़े को देखकर शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने सोमवार को नाराजगी जाहिर करते हुए सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसके साथ ही संबंधित बीएसए को भी निर्देशित किया है। शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने कहा कि प्रदेश में आरटीई के तहत 1.65 लाख बच्चों का चयन हुआ है, लेकिन उसमें से अब तक मात्र 72,044 बच्चों का ही आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। वहीं बाकी बच्चों का एडमिशन न करने के लिए स्कूल तमाम तरह के बहाने बना रहे हैं। स्कूल के खिलाफ तमाम प्रकार की शिकायतें आ रही हैं। अनेक माता-पिता या अभिभावकों की तरफ से तमाम तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि चयन के बावजूद उनके बच्चे का एडमिशन नहीं हो सका है और स्कूल प्रबंधन तमाम प्रकार के अनावश्यक कागजात मांग कर उन्हें परेशान कर रहा है या एडमिशन लेने में आनाकानी कर रहा है। ऐसे में इन विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह भी पढ़ेः छात्रवृत्ति के लिए अब 75% बायोमेट्रिक उपस्थिति जरूरी, बायोमेट्रिक के जरिए दर्ज होगी अटेंडेंस

संबंधित समाचार