बरेली: पतले धान की बुआई कर फंसे किसान, नहीं हो रही खरीद
बरेली/क्योलडि़या, अमृत विचार। अच्छी प्रजाति के पतले धान की बुवाई करने वाले किसान खुद का ठगा महसूस कर रहे हैं। केंद्र प्रभारी उनका धान नहीं खरीद रहे हैं और उनको यह कहकर लौटा रहे है कि पतली प्रजाति के धान की रिकवरी कम है तो वहीं मोटा धान लेकर आने वाले किसानों को नमी अधिक …
बरेली/क्योलडि़या, अमृत विचार। अच्छी प्रजाति के पतले धान की बुवाई करने वाले किसान खुद का ठगा महसूस कर रहे हैं। केंद्र प्रभारी उनका धान नहीं खरीद रहे हैं और उनको यह कहकर लौटा रहे है कि पतली प्रजाति के धान की रिकवरी कम है तो वहीं मोटा धान लेकर आने वाले किसानों को नमी अधिक बताकर लौटाया जा रहा है।
ऐसे में बासमती, सुगंधा, रेश्मा प्रजाति का धान करने वाले किसानों को आढ़तों पर कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। जिससे उनकी लागत तक निकलना मुश्किल है। लागत बढ़ने और कीमत कम मिलने से परेशान अन्नदाता सिस्टम को कोस रहे हैं।
1 अक्टूबर से शुरू हुई धान की सरकारी खरीद के लिए जिले में 124 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। यहां सामान्य प्रजाति के धान की 1868 और ग्रेड ए की 1888 प्रति क्विंटल कीमत पर खरीद की जानी है। इस बार एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में किसानों ने धान की बुवाई की है। धान की कटाई शुरू हो गई है, लेकिन खरीद कछुआ गति से चल रही है। बताया जा रहा है पतली प्रजाति का धान अक्टूबर के पहले सप्ताह से ही बाजार में आने लगा था, लेकिन केंद्रों पर खरीदा नहीं जा रहा। जिसके चलते किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
हाल ये है कि पतली प्रजाति का धान लेकर पहुंचने वाले किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। वह मजबूरी में 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल में आढ़तियों को बेचने को मजबूर हैं। इधर, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मानक निर्धारित होने की वजह से केंद्रों पर केवल कॉमन धान ही लिया जाता है। पतला प्रजाजि का धान यहां नहीं खरीद जाता है, इसलिए किसान कम कीमत में धान बेचने को मजबूर हैं। इधर, आरएफसी जोगिंदर सिंह का कहना है शासन की मंशा अनुरूप ही धान की खरीद होगी। किसानों को केंद्र पर किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। इसको लेकर मंडल के सभी जिला डिप्टी आरएमओ को निर्देश दिए गए हैं।
कम खरीद की एक वजह यह भी
1 अक्टूबर से शुरू हुई धान की खरीद में बिचौलिया के हावी होने की वजह से जहां किसान परेशान हैं। वहीं, बताया जाता है इन दिनों खरीद केंद्रों पर बासमती, सरबती, सुंगध आदि प्रताजियों से संबंधित पतला धान नहीं खरीदा जा रहा। सिर्फ मोटी प्रजाति का धान ही खरीदा जा रहा है। मोटी प्रजाति के बदले पतली प्रजाति का धान पहले पककर बाजार में आता है। मोटी प्रजाति का धान बाद में आता है।
