सैनिकों का सम्मान
यह हमारे देश के वीर सैनिकों का हौसला, उनका युद्ध कौशल तथा ताकत ही है कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। इधर के कुछ वर्षों में जब पाक समर्थित आतंकवाद ने सिर उठाया और चीन भी अपनी चालें चलने लगा तो देश के सैनिकों ने दिखा दिया कि वह कैसे जान की बाजी …
यह हमारे देश के वीर सैनिकों का हौसला, उनका युद्ध कौशल तथा ताकत ही है कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। इधर के कुछ वर्षों में जब पाक समर्थित आतंकवाद ने सिर उठाया और चीन भी अपनी चालें चलने लगा तो देश के सैनिकों ने दिखा दिया कि वह कैसे जान की बाजी लगाकर दुश्मन को उसी के घर जाकर भी ढेर कर सकते हैं। युद्ध का ही क्यों, देश के भीतर भी जब कभी कोई आपदा आई हो, हमारी सेना ने हमेशा ही अपना सर्वस्व लगा दिया।
इधर गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से सामना होने के बाद जो शक्ति हमारे सैनिकों ने दिखाई, उसका चीनी सेना के पास कोई जवाब नहीं था। यही कारण है कि चीन अब अपनी चालबाजियों से पीछे हट गया है। सैनिकों का देश के प्रति खुद को सर्वस्व न्यौछावर करने का जो महाप्रण है, उसकी महत्ता को समझते हुए ही प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में दिवाली के दिन एक दीपक सीमा पर तैनात सैनिकों के नाम जलाने की अपील की तो यह स्वाभाविक ही था कि उनका हौसला इससे और बढ़ेगा। चूंकि त्योहारी सीजन सामने है और लोगों को इस वक्त का वर्ष भर इंतजार रहता है। मगर दूसरी ओर सैनिक भी हैं, जो तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच सीमा पर मोर्चा लिए तैनात रहते हैं।
इसके साथ ही यह बात भी महत्वपूर्ण है कि जिन परिवारों के बेटे-बेटियां आज सरहद पर हैं, उन्हें भी हौसले की जरूरत है ताकि उन्हें गर्व हो सके कि वह भारत मां की सेवा में अपने बेटे-बेटियों के माध्यम से तत्पर हैं। कहने में तो यह बात आसान लगती है कि सीमा पर सैनिक तैनात हैं, मगर वहां की स्थितियों का सामना करने की जो क्षमता हमारे सैनिकों में है, वह सामान्य लोगों में नहीं हो सकती।
लिहाजा प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान ही किया जाना चाहिए ताकि सीमा पर तैनात हमारे सैनिक और उनके परिवार को इस बात की तसल्ली हो सके कि किसी भी परिस्थिति में देशवासी भी उनके साथ खड़े हैं। सैन्य सम्मान की यह परंपरा अपने आप में महत्वपूर्ण है, वह भी तब, जब हमारा देश पाकिस्तान जैसे नापाक पड़ोसी से आतंक के मोर्चे पर जूझ रहा हो।
दूसरी ओर चीन भी भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रच रहा है। सर्दियों के शुरू होने के साथ चीन, पाकिस्तान की हरकतों का मुकाबला करने के लिए सैनिकों को और दुरूह परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करनी है। ऐसे में उनकी चुनौती और बढ़ जाती है। ऐसे वक्त में भारत माता के इन वीर सपूतों की सुरक्षा के लिए अगर हम दिवाली पर एक दीया उनके नाम पर जलाते हैं तो यह उनकी वीरता और उनके संकल्प के प्रति हमारा भी संकल्प होगा।
