Auraiya: कल सिंचाई विभाग की जमीन पर गरजेगा बुलडोजर; अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए तैयारियां पूरी, मकानों में चस्पा किए गए नोटिस
औरैया, अमृत विचार। कस्बा दिबियापुर में विलराया पनवाड़ी मार्ग में बने 170 वर्ष पुराने क्षतिग्रस्त पुल पर भारी वाहनों के आवागमन रोके जाने हेतु लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग एक वर्ष पूर्व हाइट गेज लगाया जा चुका है।
पुल को दृष्टिगत रखते हुए क्षतिग्रस्त लघु सेतु के समानांतर स्वीकृत किये गये नये आर.सी.सी. बाक्स टाइप लघु सेतु का निर्माण होना है। पुल निर्माण हेतु 322 लाख रूपये की धनराशि की स्वीकृति शासन द्वारा प्राप्त हो चुकी है।परन्तु एप्रोच रोड पर सिंचाई विभाग की भूमि पर 45 पक्के अवैध निर्माण बनाकर अतिक्रमण किया गया है।
अतिक्रमण हटाने के लिए अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, परन्तु अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध अतिक्रमण न हटाए जाने से कार्य शुरू कराए जाने में देरी हो रही है। लिहाजा, दिबियापुर नगर के नहर बाजार में सिंचाई विभाग ने शनिवार को अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस चस्पा कर मुनादी कराई। जिसके बाद दुकानदारों में हड़कंप मच गया।
दुकानों व मकानों में चस्पा किए गए नोटिस में बताया गया कि 13 जुलाई को सुबह 9 बजे से अतिक्रमण हटाने का कार्य शुरू किया जाएगा। दुकानदारों व मकान मालिकों को निर्देश दिया गया कि अवैध कब्जे को खाली कर दे और अपना संपूर्ण मलबा उठा लें अन्यथा बलपूर्वक कब्जे को हटा दिया जाएगा।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता प्रदीप पटेल ने बताया कि 13 जुलाई से पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण को हटाया जाएगा ,जिसके लिए शुक्रवार को मुनादी कराई गई है। वही सिंचाई विभाग के एई सतीश कुमार ने बताया कि 13 जुलाई से नहर पुल के पूर्वी दिशा में 45 दुकानों, मकानों में अतिक्रमण हटाया जाएगा, जिसकी पूरी तैयारिया कर ली गई है। दस जेसीबी मशीनें मंगा ली गई और इस पर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पर्याप्त फोर्स भी उपलब्ध है।
पिछले सप्ताह जिला मुख्यालय ककोर में एडीएम की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और नहर बाजार के व्यापारियों की बैठक हुई थी। जिसमें नहर बाजार के व्यापारियों ने व्यापारियों का नुकसान और व्यापार चौपट न हो, इसके लिए बाईपास बनाने की मांग रखी थी।
इसी संबंध में दूसरी बैठक होनी थी। लेकिन नहर बाजार के व्यापारी नहीं गए। कुछ व्यापारियों का कहना था कि बैठक की सूचना बैठक शुरू होने से कुछ घंटे पहले मिली थी।अधिकारियों को सूचना एक दिन पहले देनी चाहिए थी। वहीं व्यापारी मकान, दुकान को टूटने से बचाने के लिए जनप्रतिनिधि व अधिकारियों से गुहार कर रहे थे।
