Kannauj में अभियान से वारे न्यारे: कमाई का जरिया बना पौधरोपण, सरकार को 21 लाख की चपत

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Edited By Amrit Vichar
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तीन अधिकारियों की कमेटी की जांच के बाद तिर्वा क्षेत्र का हुआ खुलासा

कन्नौज, अमृत विचार। जिस पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए सरकार हर साल पौधरोपण अभियान चलाकर रिकार्ड बनाती है वह अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। बिल-वाउचर में भी खेल होता है। वन विभाग की ओर से लगाए गए नौ वन ब्लॉकों में पौधरोपण से करीब 21 लाख रुपये की फिजूलखर्ची पकड़ी गई है। यह खुलासा तीन अधिकारियों की टीम द्वारा जांच के बाद हुआ है। 

हर वर्ष पौधरोपण के नाम पर भारीभरकम बजट खर्च होता है। सिंचाई, गड्ढा खुदाई, ट्रैक्टर से मिट्टी लेवल व जुताई, पाइप, पौधों आदि पर व्यय किया जाता है। तिर्वा तहसील क्षेत्र में धन की खूब बर्बादी हुई है या यूं कहें की फर्जी बिल-वाउचर लगाकर रुपया निकाला गया है।

मामला जब सुर्खियों में आया तो 21 फरवरी को समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने पत्र लिखकर डीएम शुभ्रान्त शुक्ल को जांच कराने को कहा था। उसके बाद ही सीडीओ रामकृपाल चौधरी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी। कमेटी में अधिशाषी अभियंता सिंचाई सूर्यमणि सिंह, डीसी मनरेगा दयाराम यादव (अब पीडी डीआरडीए प्रतापगढ़) व पीडी डीआरडीए रामऔतार सिंह शामिल रहे। 

टीम ने स्थलीय निरीक्षण के साथ ही अभिलेखों का भी सत्यापन किया। बताया गया है कि नौ परियोजनाओं पर 89 लाख 33 हजार 184 रुपये खर्च किया गया है। इसके सापेक्ष मौके पर 68 लाख 65 हजार 519 रुपये ही खर्च होने की पुष्टि हुई है। 20 लाख 67 हजार 665 रुपये की फिजूलखर्ची यानि अपव्यय पकड़ा गया है। दूसरी ओर गड़बड़ी के चलते वर्तमान डीएफओ हेमंत सेठ ने कुछ कर्मियों पर कार्रवाई की थी। वन रक्षक को भी निलंबित किया गया था। 

इस तरह हुई धन की बर्बादी

ब्लॉक उमर्दा क्षेत्र के हरेईपुर वन ब्लॉक-2 में 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 1600 मीटर सुरक्षा खाई बनाकर करीब 25 हजार गड्ढे ट्रैक्टर से परंपरागत अग्रिम मिट्टी कार्य वित्तीय वर्ष 2022-23 में कराए गए थे। यहां सिंचाई के लिए बोरिंग नहीं कराई गई। 250 मीटर प्लास्टिक पाइप भी नहीं खरीदा गया। 

वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस ब्लॉक में करीब 24 हजार गड्ढों में बालू जिप्सम व गोबर खाद मिलाकर करीब 24 हजार विलायती बबूल के पौधों का रोपण किया गया। यहां 90,423 रुपये का अपव्यय पकड़ा गया। हरेईपुर वन ब्लॉक-3 में दो लाख 74 हजार 436 रुपये का अपव्यय हुआ। करीब 22 हजार गड्ढों में बालू जिप्सम व गोबर खाद मिलाकर विलायती बबूल पौधे लगाए गए। 

वन विभाग ने इस तरह लगाया चूना

वन ब्लॉक                   कुल खर्च        वास्तविक खर्च    फिजूलखर्ची 

हरेईपुर वन ब्लॉक-एक     1015088            922717                92371
हरेईपुर वन ब्लॉक-दो       1015088           924665                90423
हरेईपुर वन ब्लॉक-तीन     1015098           740662               274436  
हरेईपुर वन ब्लॉक-चार      967296            620462               346834
खैरनगर वन ब्लॉक-एक     967806            765457               202349
गुरौली वन ब्लॉक-एक       967296            787789               179507
सुर्सी वन ब्लॉक-एक       1009108             753071               256037
सुर्सी वन ब्लॉक-दो          974896             719155               255741
सुर्सी वन ब्लॉक-तीन       1001508             631542               369966

तत्कालीन डीएफओ हैं चर्चा में

तत्कालीन डीएफओ आरके सिंह फिर चर्चा में हैं। उनके ही कार्यकाल में यह गड़बड़ी होना बताया जा रहा है। कन्नौज में तैनाती के दौरान वह लोगों के साथ अच्छी तरह से पेश नहीं आते थे। कुछ कर्मचारी भी परेशान थे।

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