प्रयागराज: सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि में परिवर्तन किए बिना कर्मचारियों को सेवानिवृत्त नहीं किया जा सकता- हाईकोर्ट

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के नियमों को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को उसकी सेवा पुस्तिका में मूल रूप से दर्ज जन्म तिथि में परिवर्तन किए बिना सेवानिवृत्त नहीं किया जा सकता है। नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच रोजगार का एक अनुबंध होता है। नियोक्ता द्वारा रखी गई सेवा पुस्तिका रोजगार के अनुबंध का एक हिस्सा है। इसमें कोई भी परिवर्तन पहले होना चाहिए, क्योंकि यह रोजगार की शर्तों को बदल देता है। 

यह जीवन बीमा पॉलिसी सेवा कानून में आयु निर्धारित करने के उद्देश्य से एक दस्तावेज नहीं है। कोर्ट ने माना कि सेवा कानून में आयु निर्धारण के लिए जीवन बीमा पॉलिसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही वर्तमान मामले में कथित आयु विसंगतियों के संबंध में अधिकारियों द्वारा कोई जांच भी नहीं की गई। 

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सेवा में भर्ती (जन्मतिथि निर्धारण) नियम,1974 के नियम 2 और 3 का हवाला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की जन्मतिथि कर्मचारी के हाईस्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार दर्ज की जानी चाहिए और अगर हाई स्कूल परीक्षा प्रमाण पत्र उपलब्ध न हो तो उस स्थिति में रोजगार के समय दर्ज की गई जन्मतिथि को सही जन्मतिथि माना जाएगा, जिसे किसी भी स्थिति में बदला नहीं जा सकता है। 

वर्तमान मामले पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही उचित और तर्कसंगत होनी चाहिए, विशेषकर सेवा मामलों में जहां कर्मचारियों का हित दांव पर लगा हो। अंत में कोर्ट ने याची के खिलाफ आक्षेपित आदेश को रद्द करते हुए उसे सेवानिवृत्ति की तिथि तक का वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकल पीठ ने सुरेश यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया।

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