फोगाट की अयोग्यता

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक में अयोग्य करार दिए जाने पर पूरा देश स्तब्ध है। निश्चित रूप से यह घटना विनेश के लिए ही नहीं समूचे देश और उन सब खेल प्रेमियों के लिए दुखदायी है जो देश का नाम रोशन करने के लिए अपने खेल में जी-जान लगा देते हैं। इस ओलंपिक में भारतीय एथलीट के साथ हुई खेल इतिहास की यह सबसे चौंकाने वाली घटना है। विश्व विजेता पहलवानों को हरा कर फाइनल में पहुंची विनेश फोगाट को तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

गौरतलब है कि मंगलवार को 50 किलो वजन वर्ग में वह कुश्ती के तीन मुकाबले जीत कर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनी। सेमीफाइनल में उन्होंने क्यूबा की पहलवान गुजमान लोपेजा को, क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन की ओकसाना लिवाच और प्री क्वार्टरफाइनल में विश्व चैंपियन जापान की युई सुसाकी को मात दी थी। उन्हें बुधवार रात करीब 10 बजे स्वर्ण पदक के लिए अमेरिकी पहलवान सारा एन हिल्डरब्रांट से मुकाबला करना था। वास्तव में विनेश ने जो किया है वह कल्पना से परे है। विनेश ने जिस जद्दोजहद से स्वर्ण लाने का उपक्रम किया था उसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है। केन्द्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को कहा कि भारत ने महिला पहलवान विनेश फोगाट के मुद्दे को लेकर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के समक्ष विरोध दर्ज कराया है। 

यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के नियमों और विनियमों के अनुसार सभी प्रतियोगियों के लिए संबंधित श्रेणी में प्रत्येक सुबह वजन-माप का किया जाता है। विनेश का वजन 50 किलो 100 ग्राम पाया गया। इसलिए उन्हें स्पर्धा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। सवाल है कि इसमें लोगों को साजिश जैसा क्यों लग रहा है। मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने भी आरोप लगाया कि ओलंपिक से पहलवान विनेश फोगाट को अयोग्य करार दिया जाना साजिश भी हो सकती है क्योंकि उसके जैसे बेहतर खिलाड़ियों को बड़े टूर्नामेंटों से पहले वजन कम करने की तकनीक बखूबी आती है।

ऐसे में जब भारत सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और पूरा देश फोगाट के साथ है, विचार करने की जरूरत है कि किससे कहां गलती हुई और कहां लापरवाही हुई। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा भी पेरिस में है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे इस बारे में उचित कार्रवाई करने के लिए कहा है। उम्मीद है भारतीय ओलंपिक संघ इस निर्णय को मजबूती से चैलेंज कर देशवासियों की प्रेरणा खिलाड़ी को न्याय दिलाएगा।