Kanpur: नजूल की 1465 जमीनों के खंगाले जा रहे दस्तावेज; फ्री होल्ड, पट्टा सीमा व लीज रेंट समेत सभी बिंदुओं पर पड़ताल चालू
कानपुर, अमृत विचार। सिविल लाइन में नजूल की करोड़ों की जमीन पर कब्जे के प्रयास के बाद जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र में 1465 जमीनों को तलाश लिया है। जिसका दायरा करीब 38 करोड़ वर्गमीटर है। इन जमीनों के दस्तावेज खंगाले हैं। जमीनों की फ्री होल्ड, पट्टा सीमा, जमीन के पट्टे का मकसद, लीज रेंट समेत सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। टीमें मौके पर जाकर नजूल जमीनों की स्थिति देख रही हैं। जल्द इन सभी जमीनों को सरकारी खाते में दर्ज किया जाएगा, जिसकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह नजूल की जमीनों की रिपोर्ट पर खुद निगरानी कर रहे हैं। संबंधित जांच टीम से रोज रिपोर्ट ली जा रही है। हडर्ड स्कूल के सामने जमीन का मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने सभी जमीनों का भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया था। जमीनों को लेकर जांच शुरू हुई तो काफी चीजें खुलती चली गई। जांच टीम के अनुसार शहर में अकेले सिविल लाइंस क्षेत्र में ही 95 प्रतिशत नजूल की बेशकीमती जमीनें हैं। जो ब्रिटिश शासन में अस्पतालों, अफसरों के रहने, मिशनरी कंपाउंड, स्कूलों के लिए 99 साल की लीज पर दी गई थीं।
मौजूदा स्थिति देखें तो काफी जमीनों का पट्टा सीमा समाप्त होने पर 25 साल के लिए आगे बढ़ाया गया है। अधिकांश जमीनों की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है। नजूल की लगभग 38 करोड़ वर्ग मीटर जमीनों में पांच प्रतिशत जमीन ग्वालटोली, बांसमंडी और कोपरगंज क्षेत्र में हैं। जबकि 95 प्रतिशत अकेले सिविल लाइन क्षेत्र में हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जमीनें भूमाफिया खुर्दबुर्द कर रहे हैं। इसलिए जमीनों का ब्योरा जुटाकर कब्जेदारों से मुक्त कराई जाएंगी। इन जमीनों पर उपयोगी योजनाएं लाएंगे, जिससे भविष्य में लोगों को इसका लाभ मिल सके।
38 हजार वर्ग मीटर में जियोर्जिना हॉस्पिटल
नजूल की बेशकीमती जमीनों में सिविल लाइंस स्थित ब्रिटिश शासन में बना दि जियोर्जिना मैकरॉबर्ट मेमोरियल हॉस्पिटल है। यह अस्पताल 38 हजार वर्गमीटर में है। अस्पताल में लगे शिलापट के अनुसार उस वक्त अस्पताल के मालिक जेम्स स्कॉर्जी मेस्टन ने अपनी पत्नी की याद में यह अस्पताल बनाया था।
आजादी से पहले ब्रिटिश शासन ने इस अस्पताल के लिए ट्रस्ट तैयार किया और जिम्मेदारी 11 सदस्यों की कमेटी को सौंपी थी। बनाई गई कमेटी के सदस्यों का देहांत होने के बाद यह प्रापर्टी विवादों में आ गई। इस जमीन पर कई दावे भी आए। लेकिन, अच्छी बात यह रही कि सरकार ने इस जमीन को भूमाफिया से सुरक्षित रखा।
