मंडल की फिजा को जहरीली बना रहे डेढ़ लाख पुराने वाहन

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। मुरादाबाद दूषित हवाओं से घिर गया है। हैरत की बात तो यह है कि प्रदूषण के मामले में मुरादाबाद प्रदूषित शहरों की सूची में सबसे टॉप पर चल रहा है। प्रदूषण बढ़ने का बड़ा कारण शहर में दौड़ रहे 15 साल पुराने अनफिट वाहन भी हैं। जी हां, यह वाहन शहर की फिजा …

मुरादाबाद,अमृत विचार। मुरादाबाद दूषित हवाओं से घिर गया है। हैरत की बात तो यह है कि प्रदूषण के मामले में मुरादाबाद प्रदूषित शहरों की सूची में सबसे टॉप पर चल रहा है। प्रदूषण बढ़ने का बड़ा कारण शहर में दौड़ रहे 15 साल पुराने अनफिट वाहन भी हैं। जी हां, यह वाहन शहर की फिजा में जहर घोल रहे हैं। लेकिन, जिम्मेदार सिर्फ कोरम पूरा करने तक ही सीमित रह गए हैं। पुराने वाहनों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई, केवल पंजीयन निरस्त कर इतिश्री कर ली गई। इसके बावजूद शहर की सड़कों पर पुराने वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं।

शहर की सड़कों पर अनफिट और कंडम वाहन शहर की फिजा में जहर घोल रहे हैं। बस, ट्रक से लेकर ऑटो व अन्य सवारी वाहनों के धुएं के साथ निकलने वाले हानिकारक तत्व सारे शरीर और खासकर दिमाग, फेंफड़े, हृदय व बल्ड पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। वाहन जनित प्रदूषण से जूझ रहे शहर में खतरे हजार हैं। शहर से गांव तक ई-कचरा की भट्ठियां धधक रही हैं। धुआं और कचरे से लोग बीमार हो रहे हैं, उसके बाद भी जिम्मेदार एजेंसियां खामोश हैं।

यहां की एक्यूआई रोजाना लोगों को डरा रही है। विभाग की ओर से पर्यायवरण को सुरक्षित रखने के लिए जोर तो दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर इसका कोई परिणाम नहीं दिख रहा। जनपद में पंजीकृत वाहनों की संख्या के पचास फीसदी वाहन स्वामियों के प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र ही नहीं है और जिनके पास यह प्रमाण पत्र हैं भी उनकी वैधता खत्म हो चुकी है। वाहन चालकों पर कार्रवाई व प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण शहर के लोग बीमारियों के गिरफ्त में आ रहे हैं।

प्रदूषण विभाग की ओर से जारी किए जा रहे आंकड़ों के मुताबिक पीतलनगरी में 326 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब स्थिति की लिस्ट में है। इस मानक को गंभीर स्थिति में पहुंचने में समय नहीं लगेगा। यदि मानक गंभीर स्थिति में पहुंचा तो शहर में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।

एनजीटी के डंडे के बाद जागते हैं जिम्मेदार
एनजीटी ने 15 साल पुराने वाहनों का पंजीयन निरस्त करने के साथ ही उनकी धरपकड़ के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, संभागीय परिवहन विभाग की ओर से इन वाहनों का पंजीयन तो निरस्त कर दिया गया। पर, ऐसे वाहनों की धरपकड़ के लिए अभियान डंडे बस्ते में चला गया। जब कभी एनजीटी की ओर से डंडा किया जाता है तो जिम्मेदारों की आंख खुलती है और कागजी कोरम पूरा कर इतिश्री कर ली जाती है। यदि अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को नष्ट किए जाए तो शहर का प्रदूषण काफी हद तक कम हो सकता है।

वायु प्रदूषण की मात्रा तय मानक से कहीं ज्यादा
केंद्रीय मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहनों से होने वाले पॉल्यूशन के कुछ मानकों तय किए गए हैं। पेट्रोल से चलने वाले सभी टू व थ्री व्हीलर वाहन के लिए कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन 4.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं अन्य सभी वाहनों के लिए कार्बन मोनो ऑक्साइड उत्सर्जन 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं डीजल वाहनों के लिए धुएं का घनत्व 65 हार्टिज से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रदूषण केंद्रों पर हुई डीजल वाहनों के धुओं की जांच में धुंए का घनत्व 70 हार्टिज से अधिक पाया गया। वहीं पेट्रोल वाहनों में कार्बन मोनो ऑक्साइड 5 प्रतिशत से अधिक रहा।

प्रदूषण से फेफड़े का कैंसर और दमा हो सकता है :
सीएमओ एमसी गर्ग ने बताया कि फेफड़े के कैंसर और दमा जैसी बीमारियों का मूल कारण वायु प्रदूषण ही है। डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाले हाइड्रोकार्बन, फेफड़ों में पहुंचकर ट्यूमर पैदा करती है। एक वाहन 960 किलोमीटर चलने पर उतनी ऑक्सीजन को प्रदूषित कर देता है, जितना एक व्यक्ति एक साल में करता है। वाहन के धुएं में मौजूद सीसा या लेड एक ऐसा जहर है, जो नाड़ियों में इकट्ठा होकर आनुवांशिक विकार पैदा कर रहे हैं। ये तत्व बच्चों को पांच गुना ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।

जनपद में छह लाख वाहन पंजीकृत
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनपद में करीब छह लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें 25,000 व्यावसायिक और पांच लाख 75 हजार वाहन प्राइवेट हैं। बता दें कि पुराने वाहनों की भी संख्या कुछ कम नहीं है। लगभग एक लाख वाहन ऐसे हैं, जो 15 वर्ष पुराने हो गए हैं। विभाग ने इन वाहनों को बाहर करने के निर्देश दे दिए हैं और ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं इसके अलावा वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

जनपद में है 32 प्रदूषण जांच केंद्र
संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने से पहले जनपद में प्रदूषण जांच केंद्रों की संख्या आठ थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 32 पहुंच गई है। यह सभी जांच केंद्र ऑनलाइन हैं। इन केंद्रो की रिपोर्ट परिवहन विभाग को आनलाइन मिलती रहती है। नए नियम लागू होने के बाद 50 फीसद वाहनों के ही प्रदूषण संबंधी प्रमाण पत्र बनवाए गए हैं। विभाग की लापरवाही की वजह से शहर में ऐसे लाखों वाहन हैं जो बेधड़क काला धुआं उगलकर लोगों की जान से खेल रहे हैं।

छवि सिंह चौहान, एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि 15 साल पुराने वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। ऐसे वाहन जो सड़कों पर धुंआ छोड़ पर्यायवरण को दूषित कर रहे हैं, विभाग की ओर से ऐसे वाहनों की रोकथाम के समय समय पर अभियान चलाकर इनका चालान किया जाता है। शीघ्र ही टीम बनाकर ऐसे वाहनों की धरपकड़ को अभियान चलाया जाएगा।

 

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