Kannauj का चर्चित नवाब सिंह प्रकरण: नवाब के वकील ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल...मामले में छह धाराएं बढ़ीं
कन्नौज, अमृत विचार। नवाब सिंह यादव पर किशोरी से छेड़छाड़ व रेप के प्रयास के आरोप में न्यायालय में सुनवाई हुई तो उनके पक्ष में वकील ने ढेर सारी दलीलें रखीं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही अनौगी जिला जेल से नवाब सिंह की पेशी हुई। इस दौरान आरोपी ने डीएनए जांच के लिए सहमति दे दी। पुलिस की ओर से दुष्कर्म समेत छह अन्य धाराएं बढ़ाने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया।
अधिवक्ता ने पुलिस कार्रवाई पर जबर्दस्त रूप से सवाल खड़े किए और फिर इस संबंध में मीडिया से भी खुलकर बात की। यह भी बताया कि लिखित जवाब के लिए एक दिन का समय मांगा गया जिस पर आज यानी 17 अगस्त को सुनवाई होगी। बताते चलें कि 11 अगस्त की रात एक किशोरी ने यूपी 112 को फोन कर नवाब पर उनके ही कॉलेज में अपने साथ छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। सूचना पर पुलिस ने शहर के चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय से आरोपी पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया था।
शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई हुई। अधिवक्ता व पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष शिवकुमार यादव ने उनकी ओर से कोर्ट में पक्ष रखा। इसके बाद मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि पुलिस ने दुष्कर्म समेत छह धाराएं बढ़ाने और डीएनए जांच के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई का आदेश जारी किया। जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी में डीएनए जांच के सवाल पर आरोपी ने सहमति दी। कोर्ट से परमिशन के बाद डीएनए जांच कराई जाएगी। कोर्ट से बाहर निकले अधिवक्ता ने प्रेस से बातचीत में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
अधिवक्ता द्वारा दलील में उठाए गए बिंदु
1- एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जब घटना स्थल पर पीड़िता, बुआ, आरोपी और सिर्फ पुलिस टीम ही थी तो वीडियो किसने रिकार्ड और वायरल किया?
2- घटना के बाद तुरंत फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर क्यों नहीं पहुंची और संबंधित कमरा सील क्यों नहीं सील किया? अभी तक कमरे को सील नहीं किया गया है।
3- जिस मोबाइल से पुलिस को शिकायत की गई उसको पुलिस ने कब्जे में क्यों नहीं लिया?
4- बुआ घटना में संदिग्ध थी तो उसे तुरंत मौके पर हिरासत में क्यों नहीं लिया? लगभग 43 घंटे बाद वह फरार हो गई, उसके लिए पुलिस को छह टीमों का गठन करना पड़ा।
5- घटना 11 अगस्त की रात 11 बजे हुई, उसके बाद पीड़िता ने 12 अगस्त की सुबह रिपोर्ट दर्ज कराई। आठ घंटे तक पीड़िता किसकी अभिरक्षा में रही?
6- पॉक्सो एक्ट में नियम है कि पीड़िता के बयान एसआई या इंस्पेक्टर रैंक के ऊपर अधिकारी ही ले सकता है, लेकिन इस मामले में महिला के समक्ष बयान क्यों दर्ज किए गए?
7- बयान लिए जाने के समय पुलिस को सिविल ड्रेस में होना चाहिए, तो वर्दी में पुलिसकर्मी क्यों उसे लेकर टहलते रहे?
8- घटना के बाद पीड़िता की बुआ के बयान पुलिस ने क्यों नहीं लिए।
9-घटना के बाद पुलिस पीड़िता को जिला अस्पताल ले गई। वहां उसने मेडिकल कराने से मना कर दिया। दादी व बाबा ने भी मना किया था। कहा था कि जब कुछ हुआ ही नहीं तो मेडिकल किस बात का, तो फिर किसके दबाव में मेडिकल कराया गया?
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