जरूरी अध्यादेश

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Edited By Amrit Vichar
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केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण रोकने के लिए अध्यादेश के जरिए नया कानून लागू करना देर से सही मगर बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए गंभीरता का परिचय देते हुए कड़ा कानून बनाते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर 5 साल की जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माने का …

केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण रोकने के लिए अध्यादेश के जरिए नया कानून लागू करना देर से सही मगर बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए गंभीरता का परिचय देते हुए कड़ा कानून बनाते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर 5 साल की जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान किया है। कानून तो केंद्र सरकार द्वारा बना दिया गया मगर इसकी महत्ता तब है जब इसके प्रावधानों पर अमल हो और प्रदूषण कम होने की दिशा में किए जा रहे कार्यों का परिणाम सामने आए और वायु गुणवत्ता में सुधार हो। इस वक्त दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।

दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गुरुवार को 402 दर्ज किया गया जो सामान्य से करीब चार गुना ज्यादा है। यह गंभीर श्रेणी में आता है। अब तक देश में प्रदूषण रोकने के नाम पर जितने भी उपाय किए गए हैं वहां देखने में आया है कि कानून तो बनते हैं मगर उनका पालन होने की जब बात आती है तो यह महज मजाक जैसा ही विषय बन जाता है। सब जानते हैं कि प्रदूषण रोकने के नाम पर हर साल अरबों-खरबों का बजट खपाया जाता है, मगर यह किस रूप में और कहां खर्च होता है और इसका क्या परिणाम होता है यह समझ से परे रहता है। वायु प्रदूषण के साथ ही देश की नदियों का प्रदूषण रोकने के नाम पर बेहिसाब पैसा खर्च किया जाता है।

गंगा प्रदूषण रोकने के लिए अब तक जितने प्रयास हुए हैं, उनमें बहुत बड़ी मात्रा में धन खर्च किया गया है मगर नतीजा ढाक की तीन पात जैसा ही है। प्रदूषण रोकने के लिए देश में कानून तो बनते हैं, मगर जरूरत ईमानदारी और जिम्मेदारी से इस दिशा में प्रयास किए जाने की है। प्रदूषण दूर करने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता की भी जरूरत है। जरूरत इस बात की भी है कि प्रदूषण फैलने वाली बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर नकेल कसी जाए, उन्हें चिन्हित किया जाए और फिर कार्रवाई हो।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश के हर प्रदेश में संचालित है, मगर यहां भी राजनीतिकरण के चलते प्रदूषण रोकने की दिशा में प्रभावी प्रयास नहीं हो पाते हैं। अब चूंकि दिल्ली-एनसीआर के लिए प्रदूषण रोकने की दिशा में अध्यादेश लाया गया है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि यह देश के अन्य भागों के लिए भी नजीर बने और प्रदूषण रोकने की दिशा में यह कदम प्रभावी हो। दिल्ली-एनसीआर से लगे इलाकों में पराली जलाने के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, मगर कानून होने के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं अगर कम नहीं हो रही हैं तो इसे व्यवस्था की खामी ही कहा जाएगा। लिहाजा जरूरत कानून बनाने के साथ ही उसके प्रावधानों पर कड़े ढंग से अमल करने की भी है ताकि हम साफ-सुथरी हवा में सांस ले सकें।