मुरादाबाद: लाकडाउन के बाद 600 घरों को टूटने से बचा चुका नारी उत्थान केंद्र

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। वक्त के साथ कमजोर हो रही रिश्तों की डोर को काफी हद तक नारी उत्थान केंद्र सहारा दे रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जीवन भर साथ रहने की डोर टूटने पर पति-पत्नी को अलग-अलग होने का दंश न झेलना पड़े। इस अलगाव के बाद पति-पत्नी के रास्ते तो जुदा होते …

मुरादाबाद,अमृत विचार। वक्त के साथ कमजोर हो रही रिश्तों की डोर को काफी हद तक नारी उत्थान केंद्र सहारा दे रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जीवन भर साथ रहने की डोर टूटने पर पति-पत्नी को अलग-अलग होने का दंश न झेलना पड़े। इस अलगाव के बाद पति-पत्नी के रास्ते तो जुदा होते हैं लेकिन उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

लिहाजा टूटते घरों को बचाने के लिए शासन की ओर से शुरू हुई पहल को नारी उत्थान केंद्र काफी बेहतर तरीके से आगे बढ़ा रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि लाकडाउन के बाद से अब तक केंद्र के काउंसलर करीब छह सौ घरों को टूटने से बचा चुके हैं। इस केंद्र में कुछ मामले तो ऐसे आते हैं कि खुद काउंसलर भी असमंजस में पड़ जाते हैं।

हालात तो यह हो जाते हैं कि वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने वाले तो छोड़िए सालों से एक दूसरे के साथ रहने वाले पति-पत्नी एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाकर अलग रहने की जिद करने लगते हैं। कभी कोई पति के नशे की आदत से तंग होता है तो कभी ससुरालियों के अधिक हस्तक्षेप से अलग रहने की बात कहता है। पति-पत्नी की जिद के आगे बच्चों के बेहतर भविष्य का हवाला देकर उनको साथ रहने के लिए राजी किया जाता है।

वर्ष 2008 में शुरू हुआ था नारी उत्थान केंद्र
टूटते घरों को बचाने के लिए वर्ष 2008 में प्रदेश सरकार ने परिवार परामर्श केंद्र खोलने के आदेश दिए थे, हालांकि बाद में इसका नाम नारी उत्थान केंद्र कर दिया गया। इसके पीछे शासन की मंशा था कि पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों में सीधे रिपोर्ट दर्ज न की जाए, बल्कि उनके बीच की गलतफहमी या कड़वाहट को दूर करके एक साथ रहने के लिए राजी किया जाए। इसके लिए बकायदा जिलावार एक टीम का गठन किया गया, जिसमें पुलिस कर्मियों के अलावा समाजसेवी, वरिष्ठ व्यक्ति, राजनीति से ताल्लुक रखने वाले, चिकित्सक व मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया गया था। शुरुआत में हर सप्ताह शनिवार को केंद्र में आने वाले मामलों की सुनवाई होती थी। बाद में जिलावार अफसरों ने अपनी सुविधा अनुसार दिन मुकर्रर कर दिया। तब से पूरे प्रदेश में हर जिले में सप्ताह में एक बार टूटते घरों को बचाने की मुहिम चल रही है, हालांकि आज के दौर में इस केंद्र में पहले प्यार फिर शादी और तकरार व नशे के कारण अलग होने के मामले अधिक आ रहे हैं।

केस-1
शादी के बीते 25 साल, फिर भी एक दूसरे से अलग रहने का दिया प्रार्थन पत्र  
काफी समय पहले नारी उत्थान केंद्र में एक ऐसा मामला आया था कि काउंसलर भी असमंजस में आ गए। दरअसल एक दंपति ने केंद्र में एक-दूसरे से अलग रहने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। दोनों को जब काउंसलिंग के लिए बुलाया गया तो वह उम्रदराज निकले। पूछने पर उन्होंने बताया कि विवाह के करीब 25 साल हो गए हैं। परेशानी पूछने पर दोनों ने एक-दूसरे पर शक करने का आरोप लगाया। उनको समझाने का प्रयास किया गया लेकिन वह साथ रहने को तैयार नहीं हुए। फिर समाज व उम्र का हवाला देकर उनको समझाने का प्रयास किया गया। दोनों को तीन बार काउंसलिंग के लिए केंद्र बुलाया गया। इसके बाद वह साथ रहने को राजी हुए।

केस—2
पति नशा छोड़े या संपत्ति बेटे के नाम करे
हाल में ही एक मामला आया कि महिला अपने पति की नशे की आदत के कारण साथ रहना नहीं चाहती थी। महानगर निवासी अंजू ने प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसकी करीब 13 साल पहले पवन से शादी हुई थी। उसका 11 साल का बेटा है। पति कुछ काम नहीं करता है और किराए की रकम से घर का गुजारा होता है। इसके अलावा पवन शराब के नशे का आदी है। जिस कारण संपत्ति बेच रहा है। महिला ने कहा कि पति या तो नशा छोड़े या फिर संपत्ति बेटे के नाम करें। दोनों को केंद्र बुलाकर समझाया गया, बच्चे के भविष्य का हवाला दिया। जिस पर पति बेटे के नाम संपत्ति करने को राजी हो गया। इसके बाद दोनों को घर भेज दिया गया।

केस-3
पहले किया प्रेम विवाह, अब चाहते हैं अलग होना  
नारी उत्थान केंद्र में गुरुवार को ही प्रेम, विवाह फिर तकरार का मामला सामने आया। केंद्र पहुंची महिला अंजिल ने अपने पति रोनी पर तमाम आरोप लगाए। खासतौर पर उसका कहना था कि पति अपने परिवार वालों की बात सुनता है। अंजलि का कहना था कि दोनों करीब छह साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे। रोनी की फल-सब्जी की आढ़त है, प्यार परवान चढ़ा तो उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले शादी कर ली। शादी के छह माह बाद ही उनके बीच तकरार होने लगी। काउंसलिंग के दौरान अंजलि का कहना था कि पति ख्याल नहीं रखता है, केवल परिवार वालों की ही बात मानता है, इसलिए वह अलग रहना चाहती है, हालांकि काउंसलिंग के जरिए फिलहाल दोनों को साथ रहने के लिए राजी कर लिया गया।

रितु नारंग काउंसलर, नारी उत्थान केंद्र

लाकडाउन के दौरान तमाम मामले विचाराधीन चल रहे थे। अनलाक के बाद मैंने और टीम में शामिल वरिष्ठ समाज सेवी एमपी सिंह ने काउंसलिंग के जरिए करीब छह सौ मामलों का निस्तारण कर दिया है। हमारा प्रयास होता है कि पति-पत्नी के रिश्तों की डोर को टूटने न दिया जाए।

 

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