बरेली: मजनूपुर में डेंगू से 16 की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने नकारा
बरेली, अमृत विचार। आलमपुर-जाफराबाद ब्लाक क्षेत्र में बरेली-बदायूं रोड पर करीब दो किलोमीटर अंदर चलने के बाद स्थित मजनूपुर गांव में डेंगू के डंक ने लोगों को परेशान कर रखा है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि यहां पिछले दो महीने में 16 लोगों की मौत डेंगू से हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब …
बरेली, अमृत विचार। आलमपुर-जाफराबाद ब्लाक क्षेत्र में बरेली-बदायूं रोड पर करीब दो किलोमीटर अंदर चलने के बाद स्थित मजनूपुर गांव में डेंगू के डंक ने लोगों को परेशान कर रखा है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि यहां पिछले दो महीने में 16 लोगों की मौत डेंगू से हो चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक हजार लोग दो महीने में डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि, इसमें अधिकांश लोग स्वस्थ हो चुके हैं। अभी भी बुखार से पीड़ित करीब डेढ़ सौ ग्रामीण निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। ग्रामीणों की मानें तो शायद ही कोई घर ऐसा बचा हो जिसमें दो से चार मरीज बुखार की चपेट में आए न हों। अधिकांश ग्रामीण झोलाछाप से अपना इलाज करवा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में मई में एक डेंगू का मरीज निकलने का दावा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जब तक एलाइजा टेस्ट नहीं हो जाता तब तक उसमें डेंगू की पुष्टि नहीं मानी जाती है। सरकारी कर्मचारी शासन की पहल को ठेंगा दिखाते हुए लापरवाही किए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार को एक टीम आई थी जो शिविर के नाम पर खानापूर्ति करके चली गई।
क्या बोले ग्रामीण
हम पांच भाई-बहन हैं। मेरी एक बहन की बुखार के चलते मौत हो गई। चिकित्सक ने बताया गया कि इन्हें डेंगू है। दो बहनें अभी भी बुखार से शहर के निजी अस्पताल में भर्ती हैं। -आसिफ, ग्रामीण
आपको गांव के हर घर में करीब दो- चार लोग बुखार से पीड़ित मिल जाएंगे। निजी अस्पताल के अनुसार, हमारे मरीज को डेंगू की पुष्टि बताई गई है। -इश्तियाक खान ग्रामीण
सरकार का ध्यान मजनूपुर की तरफ नहीं है। गांव से करीब आठ किलोमीटर दूर भमौरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। वहां भी कुछ खास सुविधा नहीं है। मजबूरन हमें निजी अस्पताल और झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है। -नवीशेर खां, ग्रामीण
मेरी बीवी को पिछले तीन दिन से बुखार आ रहा है। अल्लाह से दुआ मांग रहा हूं कि कोई अनहोनी न हो जाए। गांव की हालत बहुत ही खराब है। स्वास्थ्य विभाग पता नहीं क्या कर रहा है। -मुख्तयार अली ग्रामीण
बीते एक महीने में डेंगू से दर्जन भर से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। करीब सौ से अधिक लोग शहर के निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। पिछले सात दिनों से मेरा बेटा बुखार से पीड़ित है। उसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। -शकीलउद्दीन, प्रधान पति, मजनूपुर
आज स्वास्थ्य विभाग की टीम मजनूपुर गांव में पहुंचकर सर्वेक्षण करेगी और स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करेगी। आज ही गांव में हुई मौतों का ऑडिट कर वहां की स्थिति की रिपोर्ट भेज दी जाएगी। -डा. गौरव शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, भमौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
डेंगू से बुझा घर का चिराग, दफन हुए अरमान
आंखों में आंसू, गूंजती सिसकियां और गमगीन माहौल। यह वही घर था जिसमें कुछ दिन पहले सब खुशहाल थे लेकिन
एक पल में बुखार ने सब कुछ मातम में बदल दिया। डेंगू के कहर से घर का चिराग बुझ गया। ऐसा ही नजारा शुक्रवार को मजनूपुर में साहिल के घर पर देखने को मिला।
परिजनों के मुताबिक, रविवार को 12 वर्षीय साहिल को बुखार आया था। गांव में बुखार के प्रकोप को देखते हुए उसे शहर लाकर चौपुला स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। गुरुवार शाम को अचानक हालत बेहद गंभीर होने पर उसने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत के बाद पूरा गांव गम में डूब गया। आलम यह था कि बच्चे की मां बार-बार अपने लाडले को पुकार कर बिलख रही थी। परिजनों के मुताबिक साहिल पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा और सबका चहेता था।
मजनूपुर गांव में सूचना मिली थी। वहां टीम भिजवाकर जांच कराई गई। कोविड-19 के 27, मलेरिया के 17, टायफायड के 15 और डेंगू का एक टेस्ट कराया गया। सभी व्यक्तियों के टेस्ट निगेटिव आए। बुखार की वजह से पिछले एक माह में कोई मौत नहीं हुई है। गांव में दवा का छिड़काव कराया गया। जिले में और भी कहीं सूचना मिलेगी, तुरंत टीम भेजी जाएगी। बुखार आने की सूचना का मामला गलत है। – डा. वीके शुक्ल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
