राम के जीवन से मिली सभी संस्कृतियों को पहचान: स्वामी वासुदेवाचार्य

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अयोध्या, अमृत विचार। जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर ने कहा कि राम के बिना भारतीय संस्कृत की कल्पना बेमानी है। राम भारतीय संस्कृति के आधार हैं इन्हीं के जीवन से सारी संस्कृतियों को पहचान मिली। उन्होंने बताया कि राम ने जो मर्यादा त्रेता युग में स्थापित की वही आज कलयुग में भी देश-दुनिया के …

अयोध्या, अमृत विचार। जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर ने कहा कि राम के बिना भारतीय संस्कृत की कल्पना बेमानी है। राम भारतीय संस्कृति के आधार हैं इन्हीं के जीवन से सारी संस्कृतियों को पहचान मिली। उन्होंने बताया कि राम ने जो मर्यादा त्रेता युग में स्थापित की वही आज कलयुग में भी देश-दुनिया के लिए आधार बनी हुई है। आज भी इसी की चर्चा की जाती है और उदाहरण दिया जाता है।

वह शनिवार को राम वल्लभा कुंज प्रांगण में आयोजित भारतीय संस्कृति उत्सव 2020 को संबोधित कर रहे थे। इसके पूर्व दीप जलाकर उत्सव का शुभारंभ किया गया। अपने संबोधन में जगतगुरु रामानुजाचार्य ने कहा कि पुत्र के रूप में,पति के रूप में, भाई के रूप में, पिता के रूप में और सखा के रूप में जो उदाहरण व प्रतिमान राम ने स्थापित किया वह अनूठा है। वर्तमान सामाजिक क्षरण के दौर में इस संस्कृति और मर्यादा के प्रचार प्रसार की आवश्यकता है।

संस्कृत उत्सव को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय बोधगया के कुलपति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि राम नगरी अयोध्या राम की जन्मभूमि है। राम भारतीय संस्कृति के मूल आधार हैं। आभार ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र त्रिपाठी व संचालन सिद्धार्थ नाथ त्रिपाठी ने किया।

इनको मिला सम्मान
आयोजित कार्यक्रम में रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर वेदांती मंदिर के महंत राम शंकर दास राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास कथावाचक प्रेमभूषण जी महाराज मगध विश्वविद्यालय के कुलपति राजेंद्र प्रसाद महंत कमला दास रामायणी महान शशिकांत दास महामंडलेश्वर महंत गिरीश दास पत्रकार रमेश मिश्र अनामिका सोनी को सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह की कृति रक्षा तंत्र पुस्तक का विमोचन भी हुआ।

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