रेड जोन में पहुंचा मुरादाबाद, हवा हुई जहरीली
मुरादाबाद,अमृत विचार। पिछले कई दिनों से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण मुरादाबाद रेड जोन में पहुंच गया है। जिस वजह से महानगर की हवा में जहरीले प्रदूषण के कणों की मात्रा ओर भी बढ़ गई। बुधवार को महानगर का प्रदूषण रेड जोन में दर्ज किया गया। यहां की हवा में 2.5 पीएम(हवा में जहरीले कण)के …
मुरादाबाद,अमृत विचार। पिछले कई दिनों से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण मुरादाबाद रेड जोन में पहुंच गया है। जिस वजह से महानगर की हवा में जहरीले प्रदूषण के कणों की मात्रा ओर भी बढ़ गई। बुधवार को महानगर का प्रदूषण रेड जोन में दर्ज किया गया। यहां की हवा में 2.5 पीएम(हवा में जहरीले कण)के साथ और भी जहरीली हो गई है।
ऐसे में प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने भी इस गंभीर स्थिति को देखते हुए महानगर को रेड जोन में डाल दिया गया है। जिससे महानगर का वायु गुणवंत्ता सूचकांक 435 के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। जबकि अंबाला 440 के साथ पहले पर और गाजियाबाद 419 एक्यूआई के साथ देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
हालांकि वायु प्रदूषण रोकने के लिए प्रदूषण विभाग के साथ ही नगर निगम भी प्रयासरत है, लेकिन उसके बावजूद भी महानगर का वायु गुणवत्ता सूचकांक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिस वजह से हर रोज प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। लिहाजा सर्दी की दस्तक के बाद से धुंध छाए रहने के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इस वजह से लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है।
मौसम विभाग के अफसरों की मानें तो उत्तराखंड के समीप होने के कारण मुरादबाद तराई हिस्से में आता है। यहां पर ठंड का प्रकोप अन्य शहरों की बजाए अधिक होता है। जिस कारण सर्दियों में हर साल कोहरे का कहर देखने को मिलता है। बढ़ रहे प्रदूषण के कारण साल दर साल बढ़ रहा कोहरा हमारे वायुमंडल के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
भीषण कोहरे के कारण तेज धूप न होने के चलते आसमान पर धुएं की एक चादर छा जाती है, जिससे एक्यूआई के स्तर में अचानक इजाफा हो जाता है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं और धूल-मिट्टी भी सड़कों पर जम जाती है। जिससे लोगों के अंदर सांस की बीमारी का सामना करना पड़ता है।
फैक्ट्रियों की चिमनी से निकलने वाला धुआं फिल्टर होकर नहीं निकल रहा है जिस वजह से महानगर का वायु गुणवांत्ता सूचकांक लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में घरों से निकलते वक्त लोगों को मास्क लगाना चाहिए ताकि चिमनिओं से निकाला वाले जहरीले धुएं से लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
विकास मिश्रा, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने बताया प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं को निकलने से रोकने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
यह है एक्यूआई का मानक
0-50——- अच्छी
51-100——संतोषजनक
101-200—–मध्यम
201-300—-खराब
301-400—-बहुत खराब
401-500—–गंभीर
तारीख—————-आकड़े
27अक्टूबर———–328
28अक्टूबर———–339
29अक्टूबर———–348
30अक्टूबर———–241
31अक्टूबर———–357
1 नवंबर————-379
2नवंबर————–386
3नवंबर————–396
देश के पांच सबसे प्रदुषित शहर
अंबाला——–440
मुरादाबाद——-435
गाजियाबाद——419
ग्रेटर नोयडा———400
पानीपत——-374
दिल्ली——–373
