पीलीभीत: संपूर्ण समाधान दिवस का हाल; निस्तारण शून्य, दिव्यांग फरियादियों को गोद में ले जाकर परिजनों ने अफसरों को सुनाई फरियाद

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। आम जनमानस की समस्याओं के निस्तारण करने की बेहतर मंशा के तहत संचालित किए जा रहे संपूर्ण समाधान दिवस में अफसरों की भारी भरकम टीम होने के बावजूद निस्तारण को गति नहीं मिल पा रही है। आलम ये है कि कहने को तो संपूर्ण समाधान दिवस है, लेकिन अधिकांश फरियादियों को आश्वासन के सहारे मायूस लौटना पड़ रहा है।  

विधायक और डीएम की अध्यक्षता में पूरनपुर तहसील में हुए संपूर्ण समाधान दिवस में 58 फरियादी पेश हुए लेकिन एक भी शिकायत का निस्तारण मौके पर नहीं कराया जा सका। संबंधित विभाग को निस्तारण के निर्देश दे दिए गए हैं। वहीं दिव्यांग फरियादियों को उनके परिजन गोद में लेकर अफसरों के सामने पेश कराते रहे। तो क्या तहसील में व्हील चेयर की व्यवस्था नहीं थी?
                       
जनपद की समस्त तहसीलों में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया।  त्योहारी सीजन के बीच आयोजित इस समाधान दिवस में भी दूर दराज क्षेत्रों से ग्रामीण तहसीलों पर पहुंचे और अपनी समस्याएं अफसरों के समक्ष रखी। उन्हें उम्मीद थी कि निस्तारण होगा लेकिन फिलहाल आश्वास के साथ वापस लौटना पड़ा। पूरनपुर तहसील में भाजपा विधायक बाबूराम पासवान, डीएम संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में सुनवाई की गई। 

यहां कुल 58 शिकायती प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुए।  मगर उनमें से एक शिकायत का भी मौके पर निस्तारण नहीं हो सका। डीएम ने कहा कि अधिकारी अपनी-अपनी विभागीय शिकायतों का गुणवत्ता परक ढंग से निस्तारण कराएं। स्वयं निस्तारण के लिए मौके पर जाएं और दोनों पक्षों की मौजदूगदी में निस्तारण कराना सुनिश्चित करें। 

निस्तारण आख्या पोर्टल पर अपलोड की जाए। ताकि शिकायतकर्ता द्वारा दोबारा शिकायत न की जा सके। राजस्व सम्बन्धी मामलों में जहां पर पुलिस प्रशासन की आवश्यकता हो तो वहां पुलिस को साथ लेकर मौके पर निस्तारण कराया जाये। विधायक और डीएम ने ग्राम चंदिया हजारा के पांच लाभार्थियों को आवंटित पट्टे की खतौनियां भी दी। इस मौके पर एसपी अविनाश पाण्डेय, सीएमओ डॉ.आलोक कुमार, बीएसए अमित कुमार सिंह, डीपीआरओ सतीश कुमार आदि मौजूद रहे।

तो ब्हीलचेयर की भी नहीं व्यवस्था

तहसील परिसर में हुए संपूर्ण समाधान दिवस में निस्तारण शून्य रहा।  वहीं, व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ गए। बताते हैं कि एक दिव्यांग अपनी जमीन संबंधी शिकायत लेकर तहसील पहुंचा था। उसे परिवार के सदस्य गोद में उठाकर अफसरों के पास तक लाए थे। इसके बाद जांच कराकर समाधान का आश्वासन दिया गया। इधर, दिव्यांग फरियादियों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था न होने के सवाल उठाए जाते रहे। मामला चर्चा का विषय बना रहा।

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