गुजरात को मोदी का तोहफा, 375 किलोमीटर लंबा रास्ता घटकर होगा 90 किलोमीटर
अहमदाबाद। अपने गृहनगर गुजरात के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तोहफा देते हुए रविवार को रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन किया। इसका उद्घाटन सूरत के पास स्थित हजीरा से भावनगर जिले में स्थित घोघा तक किया गया। पीएम मोदी ने इस सेवा उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये किया। इस दौरान मोदी ने कहा कि अब …
अहमदाबाद। अपने गृहनगर गुजरात के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तोहफा देते हुए रविवार को रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन किया। इसका उद्घाटन सूरत के पास स्थित हजीरा से भावनगर जिले में स्थित घोघा तक किया गया। पीएम मोदी ने इस सेवा उद्घाटन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये किया।
इस दौरान मोदी ने कहा कि अब तक भावनगर और सूरत के बीच सड़क मार्ग से 375 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता था लेकिन इस सेवा के शुरू होने से समुद्री मार्ग से अब यह घटकर 90 किलोमीटर रह जाएगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि इस सेवा से समय और ईंधन की बचत होगी तथा राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञप्ति में कहा गया कि ‘वोयाज सिम्फनी’ नामक तीन डेक वाला रो-पैक्स फेरी पोत सूरत जिले के हजीरा और भावनगर के घोघा के बीच चलेगा और इसकी क्षमता 30 ट्रक, सौ कार और 500 यात्रियों के अलावा नौवहन दल के 34 सदस्यों को ले जाने की है। इसके अलावा, यह साल भर में 80,000 यात्री वाहन, 50,000 दोपहिया वाहन और 30,000 ट्रक ढोएगी। फेरी प्रतिदिन तीन ट्रिप करेगी और साल भर में पांच लाख यात्रियों को लाने ले जाने का काम करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि पोत परिवहन मंत्रालय का विस्तार किया जा रहा है और इसका नाम बदलकर पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय रखा जाएगा।
मोदी ने कहा कि देश के समुद्री क्षेत्र को आत्मनिर्भर भारत का अंग बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय विस्तार किया जा रहा है। अधिकांश स्थानों पर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पोत परिवहन मंत्रालय पत्तन और जलमार्ग का कार्य भी संभालते हैं। नाम में स्पष्टता होने से काम में भी स्पष्टता आएगी।
मोदी ने कहा कि ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को मजबूत करने के लिए समुद्र के रास्ते परिवहन को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों की अपेक्षा, एक स्थान से दूसरे स्थान तक सामान ले जाने का खर्च भारत में ज्यादा है और जलमार्ग से होने वाले परिवहन के जरिये इस खर्च को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
मोदी ने कहा कि इसलिए हमारा ध्यान ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर केंद्रित है जिससे निर्बाध रूप से सामान की ढुलाई सुनिश्चित की जा सके। बेहतर सामुद्रिक लॉजिस्टिक्स के लिए के साथ बेहतर अवसंरचना के लिए आज हम सिंगल विंडो व्यवस्था पर कार्य कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स के खर्च को कम करने के लिए देश बहुआयामी संपर्क व्यवस्था स्थापित करने के वास्ते एक समग्र और दूरगामी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारा प्रयास है कि सड़क, रेल, वायु और पोत परिवहन अवसंरचना के बीच खामियों को दूर कर संपर्क में सुधार किया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों में भी ‘मल्टी मोडल’ पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों से हम लॉजिस्टिक्स के खर्च को कम कर सकेंगे। यह प्रयास अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान करेंगे।
देश में जलमार्ग के संसाधन और विशेषज्ञता हमेशा से थी लेकिन पिछली सरकारों के पास इनका इस्तेमाल करने की दृष्टि नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि जलमार्ग से परिवहन, सड़क और रेल की अपेक्षा अधिक सस्ता है और इससे पर्यावरण पर बहुत कम प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके बावजूद, 2014 के बाद ही इस दिशा में समग्र प्रयास किया गया। नदियां और समुद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले भी अस्तित्व में थे। जो अस्तित्व में नहीं था, वह थी दृष्टि जिसे देश ने 2014 के बाद अनुभव किया।
मोदी ने कहा कि ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को मजबूत करने के लिए उनकी सरकार ने मछुआरों पर भी ध्यान दिया है और मत्स्यपालन अवसंरचना में सुधार के लिए 30,000 करोड़ रुपये की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ की शुरुआत की है। आज देशभर के तटीय क्षेत्रों में पत्तन क्षमता में वृद्धि की जा रही है और नए बंदरगाह का निर्माण हो रहा है। इस दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं कि देश के विकास के लिए 21,000 किलोमीटर जलमार्ग का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए ‘सागरमाला’ के तहत 500 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से लाखों करोड़ों रुपये की कई परियोजनाएं तैयार हो चुकी हैं। पिछले साल समुद्री मार्ग के जरिये होने वाले देश के पूरे व्यापार में गुजरात की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत थी। समुद्री मार्गों के लिए अवसंरचना और क्षमता के विकास का काम तेजी से हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘मेरीटाइम क्लस्टर’ और सामुद्रिक विज्ञान के लिए विश्वविद्यालय तथा भावनगर में विश्व के पहले सीएनजी टर्मिनल के निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीनगर में गुजरात अंतरराष्ट्रीय वित्त टेक-सिटी (जीआईएफटी) में गुजरात मेरीटाइम क्लस्टर बनाया जा रहा है जो बंदरगाहों और समुद्र-मार्ग के लिए समर्पित व्यवस्था होगी। गुजरात के दाहेज में भारत के पहले रासायनिक और एलएनजी टर्मिनल का निर्माण किया गया था। भावनगर में एक रो-रो टर्मिनल, तरल कार्गो टर्मिनल और एक कंटेनर टर्मिनल स्थापित किया जा रहा है। नए टर्मिनल से भावनगर बंदरगाह की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार घोघा से दाहेज के बीच 2017 में शुरू की गई फेरी सेवा पुनः चालू करने का प्रयास कर रही है। इस परियोजना के सामने प्रकृति से संबंधित कई चुनौतियां सामने आईं। आधुनिक तकनीक की सहायता से उन्हें हटाया जा रहा है और मुझे उम्मीद है कि घोघा और दाहेज के लोग जल्दी ही इस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे। मोदी ने किसानों, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों से भी बातचीत की जिन्होंने फेरी सेवा शुरू होने पर खुशी जताई। इस अवसर पर पोत परिवहन मंत्री मनसुख मंडाविया और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी मौजूद थे।
