बरेली: साम्प्रदायिक दंगा: आठ साल बाद भी गोली चलाने का आदेश नहीं दिखा सकी पुलिस

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राकेश शर्मा, बरेली। 22 जुलाई, 2012 को श्यामगंज क्षेत्र में हुए साम्प्रदायिक दंगे (फायरिंग व आगजनी) में पुलिस ने बवालियों को नियंत्रित करने के लिये गोलियां चलायी थीं। गोली किसके आदेश पर चलायीं?। इसका खुलासा आठ साल बाद भी नहीं हुआ है। ‘सच’ अभी भी फाइलों में दबा हुआ है। हालांकि, तत्कालीन बारादरी इंस्पेक्टर की …

राकेश शर्मा, बरेली। 22 जुलाई, 2012 को श्यामगंज क्षेत्र में हुए साम्प्रदायिक दंगे (फायरिंग व आगजनी) में पुलिस ने बवालियों को नियंत्रित करने के लिये गोलियां चलायी थीं। गोली किसके आदेश पर चलायीं?। इसका खुलासा आठ साल बाद भी नहीं हुआ है। ‘सच’ अभी भी फाइलों में दबा हुआ है। हालांकि, तत्कालीन बारादरी इंस्पेक्टर की जांच रिपोर्ट में एडीएम सिटी के आदेश पर गोलियां चलाने की बात कही गई है लेकिन सात रिमाइंडर भेजने के बाद भी पुलिस आठ साल से आदेश का प्रमाण नहीं दे सकी है।


23 अगस्त, 2017 को बारादरी थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने अपर जिला मजिस्ट्रेट वित्त एवं राजस्व को जो आख्या भेजी थी उसमें साफ लिखा कि एडीएम सिटी के आदेश पर गोली चलायी है लेकिन आख्या के साथ आदेश की प्रमाणित कॉपी नहीं भेजी। आख्या आने के अगले दिन 24 अगस्त, 2017 को तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व जगत पाल सिंह ने एसएसपी को पत्र लिखा और आदेश की प्रमाणित कॉपी मांगी थी।

इस बात को तीन साल गुजर गए लेकिन पुलिस की ओर से कॉपी आज तक नहीं भेजी गयी। प्रकरण में अपर जिला मजिस्ट्रेट वित्त एवं राजस्व की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सात रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं लेकिन पत्र का जवाब लौटकर नहीं आया है। इससे माना जा रहा है कि साम्प्रदायिक दंगे वाले दिन पुलिस ने बगैर किसी आदेश से गोलियां चलायीं थीं। पुलिस की आख्या पर सवाल उठ रहे हैं।

इधर, 2 मार्च, 2020 को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया था लेकिन जवाब नहीं आया है। इसमें फिर से अधिकारी पत्र भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

यह था घटनाक्रम, मजिस्ट्रेटी जांच के हुए थे आदेश
22 जुलाई, 2012 को श्यामगंज में दो समुदायों में बवाल हुआ था। पेट्रोल पंप पर तोड़फोड़ हुई थी। आगजनी के बाद दोनों पक्षों में फायरिंग हुई। बवालियों को नियंत्रित करने के लिये पुलिस को भी गोलियां चलानी पड़ी थीं। शहर के कई हिस्सों में बवाल हुआ था। तब प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश हुए थे। जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है।

बारादरी थाने के इंस्पेक्टर ने यह रिपोर्ट भेजी थी
23 अगस्त, 2017 को बारादरी थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने अपर जिला मजिस्ट्रेट वित्त एवं राजस्व को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें चार बिंदुओं पर रिपोर्ट भेजी। बिंदु नंबर-थाने के अभिलेखों के अनुसार 22 जुलाई, 2012 को श्यामगंज में हुई साम्प्रदायिक घटना के संबंध में अनुभव कुमार त्रिपाठी प्लाटून कमांडर आठवीं बटालियन पीएसी द्वारा विभिन्न धाराओं में अशांत भीड़ पर मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। जिसमें राकेश कुमार, अबरार अहमद को भीड़ द्वारा गोली मारकर घायल कर दिया गया था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिये तत्कालीन अपर मजिस्ट्रेट नगर द्वारा फायरिंग करने का आदेश दिये गये थे। बिंदु संख्या-दो में कहा कि घटना में पांच राउंड फायर व दो टीएस ग्रेनेड उग्र भीड़ को नियंत्रण और भयभीत करने के लिये चलाये गये थे। बिंदु संख्या-तीन में कहा है कि इंसास 5-56 एमएम व टीएस ग्रेनेड से फायर किये। बिंदु संख्या-चार में कहा है कि उक्त घटना में पीएसी दल के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हुये थे। थाना क्षेत्र में घटना के संबंध में अलग-अलग अभियोग पंजीकृत हैं।

रबड़ी टोला के इमरान की गोली लगने से हुई थी मौत
23 जुलाई, 2012 को रबड़ी टोला निवासी हसीन मियां ने बारादरी थाने में दर्ज कराये मुकदमे में बताया कि 22 जुलाई को करीब 11 बजे मेरा बेटा इमरान कुछ सामान लेकर बाजार से घर लौट रहा था। इमामबाड़े के पास बहुत भीड़ एकत्र थी। उससे पहले बवालियों का विवाद चौकी मठ क्षेत्र में हो चुका था। हिंदू-मुस्लिम सम्प्रदाय का आक्रोश भड़का हुआ था। दोनों सम्प्रदायों के लोग आमने-सामने आ चुके थे। दोनों ओर से फायरिंग और आगजनी हो रही थी। लोग बचते-बचाते हुए अपने-अपने घरों को भाग रहे थे। उसी बीच एक फायर आकर उसके बेटे इमरान को लगा। इसके कारण अस्प्ताल ले जाते समय उसकी मौत हो गयी। रिपोर्ट दर्ज कराने के समय यह कहा कि उसका शव घटनास्थल पर मौजूद है

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