बरेली: HIV संक्रमित होने के बावजूद बनी परिवार की ढाल, मौत को मात देकर जी रही गीता

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अंकित चौहान, बरेली। एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) संक्रमित होने के बाद भी खुशहाल जिंदगी जी जा सकती है। शहर के प्रेमनगर क्षेत्र में रहने वाली गीता (परिवर्तित नाम) एचआईवी ग्रस्त लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। वह 10 वर्ष से एचआईवी से जंग लड़ रही हैं, मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। गीता ने न केवल नियमित दवाओं का सेवन किया, बल्कि दो बच्चों और पति को भी संक्रमण से बचाया। उनकी पांच बार जांच हो चुकी है, लेकिन शरीर में वायरल लोड का स्तर जस का तस है।

मूल रूप से बिहार की रहने वाली गीता की शादी वर्ष 2011 में हुई थी। एक वर्ष बाद उन्होंने बेटी को जन्म दिया। पति की नौकरी बरेली शहर में लगी तो परिवार सहित वह वर्ष 2015 में यहां आ गईं। कुछ महीने बाद उनकी तबीयत बिगड़ी तो जिला महिला अस्पताल में जांच कराई। जांच में वह एचआईवी संक्रमित पाई गईं। काउंसिलिंग में उन्होंने बताया कि बिहार में एक बार उनकी तबीयत बिगड़ी थी तो उन्होंने एक डोनर से ब्लड खरीदा था। वह ब्लड उन्हें चढ़ा था। इससे ही उन्हें संक्रमण मिला।

पति और बच्चों के लिए बनीं ढाल
गीता ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, तब बच्ची की भी जांच कराई। दुर्भाग्य से वह भी संक्रमित पाई गई। इसके बाद उन्होंने नियमित दवाओं का सेवन और संतुलित आहार के साथ सेहत का पूरा ख्याल रखना शुरू किया। बाद में उन्होंने दो अन्य बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को जन्म दिया। इनमें कोई संक्रमण नहीं पाया गया। पति भी संक्रमण से सुरक्षित हैं। नियमित दवाओं के लेने से गीता के शरीर में वायरल लोड स्तर अधिक नहीं हुआ। वह स्थिर है। एचआईवी संक्रमित होने के बाद भी दो बच्चों के जन्म को लेकर कई सवाल भी हैं।


किस श्रेणी में है एचआईवी होने का कितना खतरा

श्रेणी -                                     खतरे का स्तर
संक्रमित रक्त चढ़ने में -             90 फीसदी
जन्मजात संक्रमण फैलना -         20 से 40 फीसदी
संभोग से -                             0.1 से 1 फीसदी तक
इंजेक्शन और दवाओं के उपयोग से - 0.67 फीसदी
संक्रमित सुई के प्रयोग से -            0.3 फीसदी
आंख और नाक के माध्यम से संक्रमित ब्लड के छींटे के संपर्क से - 0.09 फीसदी

महिला को करीब 10 साल पहले एचआईवी के संक्रमण का पता चला, लेकिन नियमित रूप से दवाओं के सेवन के साथ ही बचाव के अन्य साधन भी अपनाए, जिससे उनके दो बच्चों और पति को संक्रमण नहीं हुआ है। लंबा समय गुजरने के बाद भी उनकी सेहत ठीक है- नीरज शर्मा, काउंसलर, पीपीसीटीसी, जिला महिला अस्पताल।

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