भारत का युग

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Edited By Amrit Vichar
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पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के विस्तारित होने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी बहुआयामी विशेषताओं के कारण मजबूती से आगे बढ़ रही है। यानी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी दुनिया भारत को निवेश के पसंदीदा देश के रूप में देख रही है। महत्वपूर्ण है कि भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई)  1,000 अरब डॉलर के पार कर गया है।

भारत पर बने दुनिया के असाधारण आर्थिक विश्वास से साबित हो गया है कि दुनिया की नजरों में यह युग भारत का है। वह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन अवधि के दौरान भारत को मॉरीशस से 177.18 अरब अमेरिकी डॉलर, सिंगापुर से 167.47 अरब अमेरिकी डॉलर और अमेरिका से 67.8 अरब अमेरिकी डॉलर मिले। इनमें से ज्यादातर निवेश सेवा क्षेत्र, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर,  हार्डवेयर, दूरसंचार, व्यापार, निर्माण विकास, ऑटोमोबाइल, रसायन और दवा क्षेत्र में आया। सिंगापुर (24 प्रतिशत), नीदरलैंड (सात प्रतिशत), जापान (छह प्रतिशत), ब्रिटेन (पांच प्रतिशत), यूएई (तीन प्रतिशत) और केमैन आइलैंड्स, जर्मनी और साइप्रस की हिस्सेदारी रही। 

आंकड़ों के मुताबिक लगभग 25 प्रतिशत एफडीआई मॉरीशस मार्ग से आया। वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक विश्वास और तेज विकास के मद्देनजर देसी उद्यमियों के साथ वैश्विक उद्यमियों के लिए भी बढ़ते अवसरों का परिदृश्य उभरकर आमने आया  है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बहुआयामी क्षेत्रों में दुनिया के लिए अपार आर्थिक मौके हैं। साथ ही भारत के प्रति अपार आशावाद भी भारत को प्रगति की डगर पर आगे बढ़ा रहा है।  वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक मंचों पर भारत को विशेष अहमियत  मिल रही है। भारत को आर्थिक दुनिया के एक उभरते सितारे के रूप में देखा जा रहा है, जो देश की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय साख को दर्शाता है।

इसके पीछे एक बड़ा कारण भारतीय बाजारों में सभी तरह के उत्पादों की बढ़ती डिमांड है। नि:संदेह भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, कृषि विकास और बढ़ती ग्रामीण अर्थव्यवस्था देश और दुनिया के कारोबारियों और निवेशकों के लिए मौकों का नया द्वार खोल रही है। भारत में  निवेशकों की जो आकांक्षाएं बढ़ी हैं, वो बाज़ार को नई-नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रही हैं। अंत में भारत के विकास की गाथा को ही ताक़त मिलेगी। इससे देश 2027 में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 में विकसित भारत बनने की डगर पर निश्चय ही आगे बढ़ेगा। भारत एक वित्तीय ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का निर्माण कर सकता है। यानी वैश्विक निवेशकों के लिए पूरी दुनिया को एक परिवार बना सकता है।