हर क्षेत्र में विकास
आजादी के बाद के सात दशक में भारत दुनिया की ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन पाया था लेकिन पिछले दस वर्ष में हमारा देश पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत ने जो विकास किया है वह हर क्षेत्र में नजर आता है। बीते दस वर्षों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का आकार करीब दोगुना किया है। दस साल में भारत का निर्यात भी करीब दोगुना हो गया है। आज दुनिया को एक ऐसी अर्थव्यवस्था की जरूरत है, जो बड़े से बड़े संकट के दौरान भी मजबूती से आगे बढ़ती रहे और उसमें रुकावटें ना आए। ये सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए भी आवश्यक है।
ऐसे में महत्वपूर्ण है कि भारत को वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल करने की वकालत की जा रही है और भारत का विकास हर क्षेत्र में नजर आता है। इसलिए भारत केवल एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में कार्य करने के बजाय खुद को एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट’ के उद्घाटन सत्र में कहा अपने इसी दायित्व को समझते हुए भारत ने निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक बहुत बड़ा संकल्प लिया है। भारत ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत निम्न लागत वाले विनिर्माण पर बल दे रहा है।
गौरतलब है कि अनेक साल तक भारत दुनिया का सबसे युवा देश रहने वाला है। भारत में युवाओं का सबसे बड़ा पूल होने के साथ ही सबसे बड़ा ‘कौशलयुक्त’ युवा वर्ग होगा और सरकार इसके लिए एक के बाद एक कई फैसले ले रही है। भारत ने दिखाया है कि कैसे डिजिटल प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण, हर क्षेत्र और हर वर्ग को फायदा पहुंचा रहा है। भारत दुनिया को ‘डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी व डेटा’ की असली ताकत दिखा रहा है। सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर चल रही है। इसके लिए भारत में व्यापक ‘विनिर्माण आधार’ होना बहुत जरूरी है।
भारत को विकसित देशों में शामिल करने के लिए निवेश की गति को बनाए रखना होगा। विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए टिकाऊ वृद्धि के लिए निरंतर हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी तथा कई उभरती आर्थिक और नीतिगत चुनौतियों का सामना करना होगा। भारत में रुपये को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बनाने के लिए महंगाई पर नियंत्रण रखना होगा। भारत में ग्रामीण इलाकों को लेकर भी समावेशी, विकेंद्रीकृत और समान विकास की नीतियां लागू करनी होंगी। भारत में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना होगा।
