दिवाली और प्रदूषण
जिसका डर था वही हुआ। दीपावली पर जमकर पटाखे जलाए गए। दिल्ली में भी, जहां पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। नतीजतन, शनिवार रात से वातावरण में प्रदूषण इस हद तक बढ़ा कि इसका असर रविवार को सुबह से ही धुंध के रूप में देखने को मिलने लगा। दिल्ली-एनसीआर में हवा इतनी खराब हुई …
जिसका डर था वही हुआ। दीपावली पर जमकर पटाखे जलाए गए। दिल्ली में भी, जहां पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। नतीजतन, शनिवार रात से वातावरण में प्रदूषण इस हद तक बढ़ा कि इसका असर रविवार को सुबह से ही धुंध के रूप में देखने को मिलने लगा। दिल्ली-एनसीआर में हवा इतनी खराब हुई है कि एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर गंभीर स्थिति में पहुंच गया। कोरोना वायरस संक्रमण और बढ़ते प्रदूषण के चलते दिवाली के दिन दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया। हालांकि दीपावली की शाम इन प्रतिबंधों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
नतीजा ये हुआ कि पहले से खराब दिल्ली की हवा और खराब हो गई और गंभीर स्थित में पहुंच गई। जगह-जगह एक्यूआई बढ़ता चला गया। खबरें हैं कि दिल्ली के आनंद विहार, आईटीओ और लोधी रोड आदि इलाकों में लोगों को आंखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतें भी हुईं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से दर्ज किए गए वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में दमघोंटू हवा दुश्वारियां पैदा कर सकती है। कोरोना महामारी के लिए यह और भी खतरनाक संकेत है।
खतरों के प्रति हम कितने लापरवाह हैं कि इसका उदाहरण यही है कि दिल्ली में प्रतिबंध के बाद भी लोग नहीं माने और जमकर पटाखे जलाए गए। देश के दूसरे राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश इत्यादि में भी दीपावली पर खूब पटाखे जलाए गए। नतीजा सबके सामने हैं- वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण हद तक बढ़ गया है। सवाल यह है कि आखिर हम कब चेतेंगे। कोरोना महामारी से हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इस मामले में भी हम सबकी लापरवाही नहीं टूट रही है।
लॉकडाउन हटने के बाद सड़कों और बाजार में उमड़ती बेशुमार भीड़ वायरस को लेकर जिस तरह से बेपरवाह नजर आ रही है वह फिर कोरोना महामारी की लहर का संकेत है। जब सारे विशेषज्ञ ठंड में वायरस का प्रकोप बढ़ने की बात खुलकर कह रहे हैं फिर हम नहीं मान रहे हैं। बहुत सारे लोग तो कोरोना वायरस से बचाव के लिए जरूरी मास्क का भी प्रयोग नहीं कर रहे हैं। यह घातक स्थिति है। खुद के लिए भी और दूसरों के लिए भी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए अगर हम नहीं चेते तो इसका खमियाजा भी हमें ही भुगतना होगा।
