कोस्टगार्ड पायलट का पार्थिव शरीर पहुंचा पैतृक गांव कानपुर देहात: श्रद्धांजलि देने वालों का लगा तांता, बिठूर के गंगा घाट में हुआ अंतिम संस्कार

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कानपुर टीम, अमृत विचार। गुजरात के पोरबंदर में भारतीय तटरक्षक बल का एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर क्रैश हो जाने से श्याम नगर निवासी कोस्टगार्ड पायलट सुधीर यादव की जान चली गई थी। सहकर्मी बलिदानी का पार्थिव शरीर लेकर मंगलवार दोपहर घर पहुंचे तो श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 

बलिदानी का पार्थिव शरीर बुधवार को पैतृक गांव कानपुर देहात के मैथा स्थित हरकिशनपुर पहुंचा। जहां पुष्प अर्पित कर लोगों ने श्रद्धाजंलि दी। पार्थिव शरीर के पहुंचते ही चारों ओर चीत्कार मच गई। इसके बाद बिठूर के गंगा घाट के लिए कोस्टगार्ड पायलट के घर से अंतिम यात्रा निकाली गई।  बिठूर के गंगा घाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। 

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मंगलवार को कानपुर स्थित श्याम आवास पहुंचा था पार्थिव शरीर

शिवली के हरकिशनपुर निवासी नवाब सिंह यादव के छोटे बेटे सुधीर यादव भारतीय तटरक्षक बल में पायलट थे। रविवार दोपहर पोरबंदर में हेलीकाप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। मंगलवार को लखनऊ एयरपोर्ट से सुधीर का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से उनके श्याम नगर स्थित घर पर  दोपहर 1.40 पर लाया गया को परिजनों की चीखें गूंज उठीं।  विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, विधायक हसन रूमी, एडीएम सिटी डॉ राजेश कुमार, डीसीपी पूर्वी श्रवण कुमार सिंह, एसीपी चकेरी दिलीप कुमार, कांग्रेस नेता आलोक मिश्रा समेत कोस्टगार्ड यूनिट के अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। करीब तीन घंटे पार्थिव शरीर आवास पर रखने के बाद सेवन एयरफोर्स अस्पताल स्थित मॉर्चरी ले जाया गया। 

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जज पत्नी ने शहीद के शव पर रखा पत्र, ‘प्लीज इसे जरूर पढ़ लेना’ 

कोस्टगार्ड पायलट सुधीर कुमार को श्रद्धांजलि देते समय  उनकी जज पत्नी आवृत्ति नैथानी आंखें पोछते हुए खासी भावुक हो गईं। उन्होंने पहले से एक पत्र लिख रखा था। इसमें जीवन के यादगार पलों के साथ उनका पति के प्रति समर्पण था। कुछ ऐसा जिसे शायद वह सार्वजनिक रूप से नहीं कहना चाहती होंगी। पत्र रखते हुए उन्होंने कहा कि प्लीज इसे जरूर पढ़ लेना। फिर उन्होंने पोरबंदर से आए सहकर्मी और सुधीर के बड़े भाई धर्मेंद्र से बोलीं, आज यह अकेले होंगे। जो कोई फॉल्ट हुआ हो, मुझे माफ कर देना। वी प्राउड ऑफ यू सुधीर। पति-पत्नी के इस अगाध प्रेम और समर्पण के दृश्य से  सभी लोगों की आंखों में आंसू आ गए। 

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हमार बाबू चला गा, हीरा चला गा…

बेटे सुधीर का पार्थिव शरीर देखकर मां की चीखें निकल पड़ी। मां राजमणि बोलीं, हाय हमार बाबू चला गा...हमार हीरा चला गा... बेटे की फोटो चूमती हुए माला पहनाई। बोलीं हमसे फूल चढ़वा रहा है, तुम्हें को हमका चढ़ाना राहि। हमरे बेटन की जोड़ी फूट गई। पिता नवाब सिंह बेटे को पुष्प अर्पित करते हुए फफक कर रो पड़े। उन्होंने बेटे को सलामी दी। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला। 

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ग्रीन कॉरीडोर बना पहुंचाया पार्थिव शरीर

सुधीर यादव का पार्थिव शरीर गुजरात से विशेष विमान द्वारा लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा। इसके बाद उन्नाव सीमा तक लखनऊ पुलिस ने पॉयलट किया। कानपुर सीमा से  कमिश्नरेट पुलिस पार्थिव शरीर को ग्रीन कॉरीडोर बनाकर रामादेवी होते हुए घर लाई।

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