चाचा-भतीजा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव चाचा शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के साथ मिलकर लड़ेगी। सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अगर सपा की सरकार बनी तो उनके चाचा कैबिनेट मंत्री बनाए जाएंगे और जसवंतनगर विधानसभा …
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव चाचा शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के साथ मिलकर लड़ेगी। सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अगर सपा की सरकार बनी तो उनके चाचा कैबिनेट मंत्री बनाए जाएंगे और जसवंतनगर विधानसभा सीट पर सपा चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि यह सीट उन्होंने अपने चाचा की पार्टी के प्रत्याशी के लिए छोड़ दी है।
भतीजे का चाचा के प्रति यह मोह अनायास ही नहीं उमड़ा है। उसके निहितार्थ तलाशना जरूरी है। विधानसभा चुनाव में अब बहुत वक्त नहीं रह गया है इसलिए अखिलेश यादव ने जीत के लिए अभी से रणनीित बनानी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि चाचा शिवपाल के पक्ष में अखिलेश का बयान ऐसे वक्त पर आया है जब बिहार चुनाव के नतीजे आए गए हैं, जहां भाजपा को अच्छी सीटें मिली हैं और 75 सीटें जीतकर बिहार में नंबर एक पार्टी बनने के बाद भी राष्ट्रीय जनता दल महागठबंधन में शामिल दलों की सीटें मिलाकर भी सरकार बना पाने से चूक गया। हालांकि बिहार और उत्तर प्रदेश के समीकरण अलग हो सकते हैं लेकिन सभी दल वहां के नतीजों को सबक के तौर पर लेकर कदम उठाएंगे, इसमें कोई दोराय नहीं।
अखिलेश यादव को समझ में आ रहा है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से कोई लाभ नहीं होना है। पिछले विधानसभा चुनाव में इसका खमियाजा वह भुगत चुके हैं और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल को भी कांग्रेस के साथ कोई लाभ नहीं हुआ। जािहर है कि सपा अध्यक्ष अबकी विधानसभा चुनाव कांंग्रेस के साथ मिलकर लड़ने से रहे, लेकिन वह सपा का वोट बैंक बिखरने से बचाने का काम जरूर करेंगे।
शिवपाल सिंह यादव की प्रसपा जहां-जहां विधानसभा चुनाव लड़ेगी, वह भाजपा, बसपा या कांग्रेस को हरा पाए या नहीं और खुद जीते या हारे लेकिन वहां-वहां सपा को नुकसान जरूर पहुंचाएगी। मतों की यह सेंधमारी सपा को कई सीटों पर हरा सकती है। यह बात अखिलेश यादव को खूब समझ आ रही है। एक तरफ चर्चा यह भी है कि शिवपाल सिंह कांग्रेस या दूसरे दल से भी गठबंधन कर सकते हैं। ऐसे में, अखिलेश यादव ने चाचा के प्रति तल्खी खत्म करके फिर से उनके प्रति आदर भाव प्रकट किया है।
गौरतलब है कि अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच तल्खी इस हद तक बढ़ गई थी कि उसको सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी नहीं दूर करा पाए। कई बार यह तल्खी सार्वजनिक तौर पर भी देखने को मिलती रही। बीच में यह भी चर्चा रही कि प्रसपा का सपा में विलय हो सकता है लेकिन अब शायद भतीजे ही नहीं चाचा को भी समझ में आ गया है कि अलग-थलग रहने पर नुकसान दोनों का ही है।
