पीलीभीत: मेडिकल स्टोर की आड़ में झोलाछाप कर रहे इलाज...स्वास्थ्य विभाग बना अंजान

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Edited By Amrit Vichar
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छापामारी के लिए भी टालमटोल, खतरे में मरीजों की जान

पीलीभीत, अमृत विचार। तमाम कोशिशों के बाद भी झोलाछाप पर शिकंजा नहीं कस सका है। जनपद भर में अवैध क्लीनिक, अस्पताल और नर्सिंग होम तेजी से पनप रहे हैं। पूर्व में ऐसे भी मामले उजागर हुए हैं, जहां डिग्री किसी की लगी हुई है लेकिन प्रैक्टिस कोई और ही कर रहा है। इन अवैध क्लीनिकों में मरीजों के मौत के मामले सामने आए तो कार्रवाई की शुरुआत भी हुई। अब कई जगह मेडिकल स्टोर संचालन का लाइसेंस लेकर उसकी आड़ में ही क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं।

सीएमओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार जनपद में करीब 100 से अधिक नर्सिंग होम और निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जबकि 50 पैथोलॉजी लैब पंजीकृत हैं। झोलाछाप और फर्जी लैब संचालकों पर कार्रवाई के लिए एसीएमओ को नामित किया गया है। वहीं आयुर्वेदिक यूनानी में भी 325 क्लीनिक पंजीकृत हैं। एक नोडल अफसर अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई के लिए नामित किया गया है। मगर धरातल पर इससे कई गुना क्लीनिक अस्पताल संचालित हो रहे हैं। आलम ये है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में पूरे अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। झोलाछाप इलाज कर रहे हैं। मेडिकल के नाम पर उनके घरों और दुकानों के भीतर मरीजों को कैथ, बोतल, जांचें कराई जा रही हैं। ऑपरेशन से लेकर महिलाओं की डिलीवरी तक की जिम्मेदारी झोलाछाप या अप्रशिक्षित डॉक्टरों ने संभाल रखी है। कपांउडर और अप्रशिक्षित स्टाफ नर्स प्रसव कर रही हैं। सबसे अधिक झोलाछाप न्यूरिया क्षेत्र में पनप रहे हैं। बताते हैं कि रेलवे स्टेशन के समीप भी कई झोलाछाप मेडिकल के नाम पर क्लीनिक की तरह संचालन कर रहे हैं। जिनके पास खुद की कोई डिग्री नहीं है, लेकिन जिम्मेदारों की शह पर क्लीनिक के बाहर डॉक्टर का साइन बनाकर उपकरण रखे हुए हैं। बताते हैं कि न्यूरिया क्षेत्र में मेडिकल स्टोर पर ही झोलाछाप मरीज देख रहा था। इसकी सूचना कॉल कर स्वास्थ्य विभाग को दी गई लेकिन लिखित आदेश न मिलने की बात कहकर टाल दिया गया। शहर के आसपास के इलाकों में भी इसी तरह से फर्जीवाड़ा चल रहा है। शायद यही कारण है कि साल 2024 में स्वास्थ्य विभाग महज 50 झोलाछाप के खिलाफ ही लिखित कार्रवाई कर सका है। इतना ही नहीं, नियम है कि बीएएमएस सिर्फ आयुर्वेदिक पद्धति से ही इलाज करने के अलावा एलोपैथी की कुछ दवाएं मरीजों को दे सकते हैं। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार की मानें बीएएमएस डॉक्टर उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इतना जरूर है कि वह गाइडलाइन के तहत कुछ दवाएं और इंजेक्शन का प्रयोग कर सकते हैं। मगर, अन्य जटिल बीमारियों से संबंधित इंजेक्शन या बोतल नहीं चढ़ा सकते हैं। जबकि धरातल पर इसका भी पूर्णतया पालन नहीं हो पा रहा है।

17 की हुई शिकायत, कार्रवाई चार पर
बीसलपुर तहसील क्षेत्र में करीब 50 से अधिक लैब और सेंटर ऐसे हैं, जो मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि अधिकांश पर लाइसेंस नहीं है। बीसलपुर कस्बे के रहने वाले सतेंद्र गंगवार ने चार दिन पहले आईजीआरएस पोर्टल पर फर्जी लैब को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। जिनमें कुछ के खिलाफ साक्ष्य देने का भी दावा किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निस्तारण करने के नाम पर लीपापोती कर दी गई। 17 में सिर्फ चार लैब के खिलाफ सीज की कार्रवाई की गई। इनमें दो चुर्रासकतपुर और दो बीसलपुर कस्बे में चल रही थीं।

जानिए क्या बोले सीएमओ
सीएमओ  डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि जनपद में लगातार झोलाछाप के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। अभी हाल में ही बीसलपुर में पैथोलॉजी लैब सीज की गई है। मेडिकल स्टोर की आड़ में अगर क्लीनिक चल रहे हैं, तो उन पर भी ड्रंग इंस्पेक्टर से संपर्क कर कार्रवाई की जाएगी। बीते साल में 50 पर कार्रवाई की गई है। 

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