बरेली की इस कॉलोनी में बाहर के लोगों ने कर लिया कब्जा, कर्मचारियों की उम्मीदें टूटीं
बरेली, अमृत विचार: रेलवे की साउथ काॅलोनी में ज्यादातर आवास खंडहर हो चुके हैं। जो आवास बचे हैं, उन्हें भी मरम्मत की जरूरत है। रेलवे खंडहर आवासों को ध्वस्त करेगा, इसलिए ज्यादातर कर्मचारी आवास खाली करके चले गए। जो रह रहे हैं, वह भी सुविधाएं मिलने की उम्मीद खो चुके हैं। ज्यादातर आवासों में बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया है।
रेल लाइन के पार सुभाषनगर में रेलवे की साउथ काॅलोनी है। यहां पांच सौ से ज्यादा आवास हैं, लेकिन आधे से ज्यादा खंडहर हो चुके हैं और रेल कर्मचारी खाली करके जा चुके हैं। जिन आवासों की दशा कुछ ठीक है उनमें कर्मचारी मजबूरी में रह रहे हैं। रेल कर्मचारियों को आवंटित आवासों में बाहरी लोग रह रहे हैं। इनमें कुछ लोग अवैध तरीके से भी रहने लगे हैं। पीडब्ल्यूआई कार्यालय के पीछे ब्लाॅक में बने लगभग 150 आवासों में से 20 में ही रेल कर्मचारी हैं और शेष वेंडरों या बाहरी लोगों के कब्जे में है। इन आवासों का पानी कनेक्शन भी काटा जा चुका है फिर भी लोग काबिज हैं और रेल प्रशासन उनके सामने असहाय बना है।
रेलवे हायर सेकेंड्री स्कूल के पास पानी की टंकी के पास तमाम आवास खंडहर हो चुके हैं। दरवाजे-खिड़की भी निकाले जा चुके हैं और दीवारें भी गिरने लगी हैं। ऐसा ही हाल जीआरपी बैरक की तरफ भी है। पुराने बीएसए कार्यालय जाने वाले मार्ग में गलियों में बने आवासों में बाहरी लोग ही काबिज हैं। कुछ ट्रैकमैन और सफाई कर्मियों के परिवार यहां रह रहे हैं। उनके आवास भी जर्जर हैं। इन आवासों में रहने वाले कर्मचारियों के परिवारों की महिलाओं का कहना है कि इन आवासों को तोड़ा जाएगा। इसलिए उनमें सुधार नहीं होना है।
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