प्रदूषण: चौबीस घंटे में 43 अंक बढ़ी मुरादाबाद की एक्यूआई
मुरादाबाद, अमृत विचार। उद्योगों की ओर से प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शपथ पत्र दिया गया है कि शहर के प्रदूषण बढ़ने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। डंके की चोट पर पुलिस प्रशासन का दावा है कि यहां ई-कचरे का कोई कारोबार नहीं है, जबकि परिवहन विभाग यह मानने को तैयार ही नहीं है कि …
मुरादाबाद, अमृत विचार। उद्योगों की ओर से प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शपथ पत्र दिया गया है कि शहर के प्रदूषण बढ़ने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। डंके की चोट पर पुलिस प्रशासन का दावा है कि यहां ई-कचरे का कोई कारोबार नहीं है, जबकि परिवहन विभाग यह मानने को तैयार ही नहीं है कि शहर में वाहनजनित प्रदूषण है। इसके बाद भी शहर देश के प्रदूषित शहरों ने उबर नहीं पा रहा है। बुधवार को यहां की एक्यूआई 197 दर्ज की गयी।
उधर, पीलत भठ्ठी संचालकों के हक की लड़ाई लड़ने वाले इस बात का तर्क रखते हैं कि इतना धुआं भला पर्यावरण को क्या खतरा उत्पन्न करेगा? जबकि शहर के हवा की गुणवत्ता में खतरनाक कणों के बढ़ने का क्रम रुक नहीं रहा है। महज 24 घंटे में शहर के हवा की गुणवत्ता की खराबी 43 अंक बढ़ गया है, जिससे मुरादाबाद देश के दस गंदे शहरों में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। संसद में शहर में पीतल कारोबारियों और दस्तकारों की मांग पर सांसद डा. एसटी हसन ने सरकार से यह पूछ डाला था कि क्या मुरादाबाद में भठ्ठियों पर रोक है? जिसमें सरकार की ओर से जवाब आया था कि नहीं। यानी कि यहां दस्तकार और कारीगर लकड़ी और कोयले की भठ्ठी पर काम कर रहे हैं।
दिवाली की पूर्व संध्या पर तेज हवा और बूंदाबांदी ने यहां की हवा की गुणवत्ता में सुधार कर दिया था, जिसकी वजह से कोहरा और धुंध जैसे हालात नहीं बने। इसके बाद लोगों को सांस लेने में भी कोई दिक्कत का अनुभव नहीं हुआ। माना गया कि मौसम में यह सुधार दिवाली पर पटाखा के कम प्रयोग और अन्य एहतियात की वजह से संभव हुआ लेकिन, यह अवसर भी बहुत देर तक नहीं रह पाया। मंगलवार को शहर की हवा की गुणवत्ता भी खराब प्रदर्शन वाले थे। बुधवार को इसमें और खतरे बढ़ गये। मात्र चौबीस घंटे के भीतर हवा की एक्यूआई 43 बढ़ गयी है। यानी कि यहां जीवन हवा को लेकर खतरे में फंसा हुआ है। शहर के बीच चिमनियों और भठ्ठियों से लपटे उठ रहीं हैं। धूल और धुएं पर रोक नहीं है।
देश के दूषित हवा वाले प्रमुख शहर
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)
गाजियाबाद 236
ग्रेट नोयडा 228
आगरा 218
दिल्ली 211
मुरादाबाद 197
जींद 171
ग्वालियर 168
कानपुर 165
लखनऊ 138
भोपाल 137
(एक्यूआई स्रोत- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की साइट)
यह है वायु गुणवत्ता सूचकांक का मानक
00-50 अच्छा
51-100 संतोषजनक
101- 200 मध्यम
201- 300 खराब
301-400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
डा.अनामिका त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग (हिंदू कालेज)
यह समय पर्यावरण प्रदूषण के लिए खास है। इस मौसम में हवा में नहीं रहती है, इस वजह से हवा ऊपर की ओर नहीं उड़ पाती है। खेती, भवन- सड़क निर्माण, वाहन का धुआं और पटाखा वातावरण में प्रदूषण का बैंक बना देते हैं। इस वजह से हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है। मुरादाबाद तराई अंचल का क्षेत्र है। इस वजह से काफी दिनों से शहर रेड जोन में बना हुआ है। यह बहुत की चिंता की बात है। अभी सर्दी की दस्तक है। मौसम विभाग ने अबकी अधिक सर्दी की संभावना जतायी है। ऐसे में प्रदूषण यहां मानवजीवन को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि यह शहर इस मार से उबर नहीं पा रहा है।
डा.सीपी सिंह, एमडी मेडिसिन
हवा साफ नही है। ऐसे में खुले में घुमने वाले खासतौर से सतर्क रहें। अधिक उम्र के साथ दमा और अस्थमा के रोगी इन दिनों में सचेत रहे। प्रदूषण की वजह से इन रोगियों को अधिक खतरा रहता है। इस दिक्कत से राहत के लिए मास्क जरूर लगायें। कोरोना और प्रदूषण के सीजन में मास्क कारगर हथियार है। जरूरत इस बात की है कि हर आदमी मौसम से सतर्क रहे। सांस की दिक्कत में चिकित्सक की सलाह लें और जरूरत पर अस्पताल में भी भर्ती हो जायें।
